एल एंड ओ : लॉ एंड ऑर्डर एक मलयालम एक्शन-क्राइम ड्रामा है, जिसका निर्देशन रंजीत ने किया है और पटकथा उदयकृष्ण ने लिखी है। फिल्म में प्रकाश वर्मा मुख्य भूमिका में हैं, जबकि ममूट्टी खास भूमिका में करिक्कामुरी शन्मुघन के रूप में नजर आते हैं। यह वही आइकॉनिक किरदार है, जिसे उन्होंने रंजीत की 2004 में आई फिल्म ब्लैक में निभाया था। कई बार रिलीज टलने के बाद फिल्म 18 सितंबर, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई।

फिल्म की कहानी एक पुलिस अधिकारी और युवा भर्ती पुलिसकर्मियों के एक समूह के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कोच्चि में फैले ड्रग नेटवर्क का मुकाबला करते हैं। कहानी में एक बड़े स्तर की पुलिस एंटरटेनर फिल्म बनने के लिए जरूरी कई चीजें मौजूद हैं, लेकिन एल एंड ओ : लॉ एंड ऑर्डर पुरानी शैली की लेखन, कमजोर प्रस्तुति और ममूट्टी के बहुप्रतीक्षित किरदार के निराशाजनक इस्तेमाल की वजह से कमजोर पड़ जाती है।

एल एंड ओ : लॉ एंड ऑर्डर फिल्म की जानकारी

विवरणजानकारी
फिल्म का नामएल एंड ओ : लॉ एंड ऑर्डर
रिलीज की तारीख18 सितंबर, 2026
शैलीएक्शन, क्राइम, ड्रामा
निर्देशकरंजीत
लेखकउदयकृष्ण
निर्माताप्रेमचंद्रन ए जी, महा सुबैर
मुख्य कलाकारप्रकाश वर्मा, ममूट्टी, अभिरामी, शंकर रामकृष्णन, जॉय मैथ्यू, देवन, जॉनी एंटनी, गायत्री अशोकन
अवधि2 घंटे 38 मिनट
ओटीटी प्लेटफॉर्मअभी घोषित नहीं
रेटिंग3.5/5

लॉ एंड ऑर्डर की कहानी

डीवाईएसपी बालगोपाल (प्रकाश वर्मा) एक ऐसे पुलिस अधिकारी हैं, जो ड्रग साम्राज्य की वजह से अपने बेटे को खोने के बाद निजी त्रासदी से जूझ रहे हैं। उनके साथ चार युवा भर्ती पुलिसकर्मी जुड़ते हैं और वे मिलकर पाचा (शेरशा शरीफ) का सामना करते हैं। पाचा एक निर्दयी ड्रग माफिया है, जिसका आपराधिक नेटवर्क कोच्चि पर मजबूत पकड़ रखता है। ये पांचों पुलिस अधिकारी फिल्म के केंद्र में हैं और उनकी दोस्ती तथा एक-दूसरे के प्रति वफादारी कहानी का अहम हिस्सा बनती है।

बालगोपाल को अपराध के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अपने निजी दर्द और एक पुलिस अधिकारी के तौर पर अपनी जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। स्थिति तब और महत्वपूर्ण हो जाती है, जब करिक्कामुरी शन्मुघन (ममूट्टी), जो ब्लैक का किरदार है, कहानी में वापस आता है। फिल्म का बाकी हिस्सा पुलिस टीम और आपराधिक नेटवर्क के बीच टकराव पर केंद्रित है, जो आखिरकार अंतिम भिड़ंत की ओर बढ़ता है।

लॉ एंड ऑर्डर रिव्यू: पुरानी शैली का पुलिस ड्रामा जो असर छोड़ने में नाकाम

एल एंड ओ : लॉ एंड ऑर्डर की मूल कहानी सीधी और जानी-पहचानी है। इसमें एक दुखी पुलिस अधिकारी, युवा भर्ती, एक ड्रग माफिया और आपराधिक दुनिया मौजूद है। समस्या यह है कि पटकथा इन सभी तत्वों को एक साथ पेश करने का शायद ही कोई नया तरीका तलाशती है। द इंडियन एक्सप्रेस ने फिल्म की लेखन, दृश्यों, एक्शन और पूरी प्रस्तुति की आलोचना की है, जबकि सिनेमा एक्सप्रेस ने इसे पुरानी शैली की पुलिस गाथा बताया, जो कई बार अनजाने में हास्यास्पद हो जाती है।

पांचों युवा पुलिसकर्मियों को 2000 के दशक की मलयालम कैंपस फिल्मों से जुड़ी दोस्ती और आपसी बॉन्डिंग वाली शैली में लिखा गया है। यह गतिशीलता एक ज्यादा समकालीन पटकथा के साथ काम कर सकती थी, लेकिन यहां यह फिल्म को अक्सर किसी दूसरे दौर में अटका हुआ महसूस कराती है। फिल्म नशीली दवाओं के दुरुपयोग और उसके आसपास बने आपराधिक तंत्र जैसे सामाजिक मुद्दों को भी उठाने की कोशिश करती है। हालांकि, सामाजिक पहलू बार-बार आने वाले बदले के ड्रामा, गैंग की दुश्मनी और पुलिस बनाम अपराधियों के टकराव के नीचे दब जाता है।

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प्रकाश वर्मा और ममूट्टी की परफॉर्मेंस

प्रकाश वर्मा को बालगोपाल की केंद्रीय भूमिका मिली है। इससे पहले वह थुडरुम में पुलिस अधिकारी के किरदार में काफी चर्चा बटोर चुके हैं। यहां वह एक ज्यादा संवेदनशील किरदार निभाते हैं, जो दुख से जूझते हुए भी अपराध के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखता है। उनका अभिनय फिल्म को कुछ भावनात्मक आधार देता है। सहायक कलाकारों में अभिरामी, शंकर रामकृष्णन, गायत्री अशोकन, आनंद मनमधन, देवन, जॉय मैथ्यू और कई अन्य कलाकार शामिल हैं। सीमित सामग्री मिलने के बावजूद कलाकारों के कुछ सदस्य अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में सफल रहते हैं।

ममूट्टी का करिक्कामुरी शन्मुघन के रूप में नजर आना स्वाभाविक रूप से फिल्म की सबसे बड़ी चर्चाओं में से एक है। यह किरदार मूल रूप से ब्लैक में नजर आया था, जिसका निर्देशन भी रंजीत ने किया था। हालांकि, द इंडियन एक्सप्रेस की समीक्षा के मुताबिक, इस किरदार की वापसी उसके पुराने प्रभाव के साथ न्याय नहीं कर पाती, जिससे लंबे समय से चर्चा में रहा यह कैमियो बेकार होता हुआ महसूस होता है।

संगीत और दृश्य प्रस्तुति

तकनीकी प्रस्तुति भी फिल्म का एक कमजोर पक्ष है। प्रशांत रवींद्रन ने सिनेमैटोग्राफी संभाली है, लेकिन द इंडियन एक्सप्रेस की समीक्षा में दृश्यों को शौकिया स्तर का बताया गया और यह महसूस किया गया कि उनमें वह माहौल पैदा नहीं हो पाता, जो सिनेमैटोग्राफर अमल नीरद ने ब्लैक में तैयार किया था।

बिजीबल के बैकग्राउंड स्कोर और जो डेनियल के गानों को भी द इंडियन एक्सप्रेस की समीक्षा में आलोचना का सामना करना पड़ा। ब्लैक के “अंबालक्करा” गाने को दोबारा तैयार करने की खास तौर पर आलोचना की गई है, क्योंकि यह मूल गाने जैसा प्रभाव पैदा नहीं कर पाता। एक्शन भी आम बड़े पर्दे वाली फिल्मों के परिचित तरीके का अनुसरण करता है, जिसमें बार-बार दोहराए गए लड़ाई के दृश्य और अनुमानित तबाही देखने को मिलती है, बजाय ऐसे दृश्यों के जो पुलिस ड्रामा में कुछ अलग जोड़ सकें।

कमजोरियां क्या हैं?

  • पुरानी शैली की पटकथा
  • कमजोर दृश्य प्रस्तुति
  • निराशाजनक कैमियो
  • अनुमानित एक्शन

क्या एल एंड ओ : लॉ एंड ऑर्डर देखना चाहिए?

इसे देखें अगर:

  • आप ममूट्टी के प्रशंसक हैं
  • आप मलयालम सिनेमा देखते हैं
  • आपको पुलिस ड्रामा पसंद हैं
  • आप शन्मुघन की वापसी देखना चाहते हैं

इसे छोड़ दें अगर:

  • आप ब्लैक वाली पुरानी यादों की उम्मीद कर रहे हैं
  • आप नई कहानी देखना चाहते हैं
  • आपको यथार्थवादी पुलिस फिल्में पसंद हैं
  • आपको पुरानी शैली के एक्शन ड्रामा पसंद नहीं हैं

अंतिम फैसला

एल एंड ओ : लॉ एंड ऑर्डर की बुनियाद दिलचस्प है, खासकर प्रकाश वर्मा के पुलिस अधिकारी, पांच भर्ती पुलिसकर्मियों की कहानी और ममूट्टी के करिक्कामुरी शन्मुघन की वापसी को देखते हुए। दुर्भाग्य से, फिल्म की पुरानी शैली की लेखन और असमान प्रस्तुति इन सभी तत्वों को प्रभावी ढंग से एक साथ लाने में नाकाम रहती है।

ममूट्टी का बहुप्रतीक्षित कैमियो उन दर्शकों को संतुष्ट करने की संभावना कम रखता है, जो ब्लैक जैसा प्रभाव देखने की उम्मीद कर रहे थे। वहीं, एक्शन और तकनीकी पहलुओं में भी कोई खास नयापन नहीं है। मुख्य कलाकार के समर्पित अभिनय और प्रासंगिक विषय के बावजूद, लॉ एंड ऑर्डर आखिरकार उस बड़े पुलिस थ्रिलर के रूप में असर छोड़ने में संघर्ष करती है, जैसा बनने की यह कोशिश करती है।

रेटिंग: 3.5/5

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