फिल्म वाइब एक हिंदी जासूसी कॉमेडी है, जिसका निर्देशन, लेखन और निर्माण कुणाल खेमू ने किया है। वह फिल्म में मुख्य भूमिका भी निभा रहे हैं। फिल्म में कुणाल खेमू, स्पर्श श्रीवास्तव, प्रीति जिंटा और वंशिका धीर मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि शर्मिला टैगोर कैमियो में नजर आती हैं। कहानी दो सामान्य दोस्तों की है, जो गलती से मुंबई पर होने वाले आतंकी हमले से जुड़े एक गुप्त मिशन में फंस जाते हैं। फिल्म में कुछ मजेदार पल और मजबूत अभिनय देखने को मिलता है, लेकिन कॉमेडी से गंभीर एक्शन की ओर इसका बदलाव हर जगह प्रभावी नहीं लगता।

वाइब फिल्म की पूरी जानकारी

जानकारीविवरण
फिल्म का नामवाइब
रिलीज की तारीख18 सितंबर 2026
शैलीजासूसी कॉमेडी, एक्शन, कॉमेडी
निर्देशककुणाल खेमू
लेखककुणाल खेमू
निर्माताकुणाल खेमू, चिराग निहलानी
मुख्य कलाकारकुणाल खेमू, प्रीति जिंटा
ओटीटी मंचघोषित नहीं
रेटिंग2.5/5

फिल्म 18 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई और इसकी कहानी 2023 के मुंबई में सेट है। इसमें दोस्ती, रोमांस, कॉमेडी, जासूसी और एक्शन को एक ही कहानी में शामिल किया गया है।

वाइब की कहानी

हार्दिक (कुणाल खेमू) दिल्ली से मुंबई आता है और उसने हाल ही में अपना पुनर्वास कार्यक्रम पूरा किया है। उसका सबसे अच्छा दोस्त बग्स (स्पर्श श्रीवास्तव) एक आईटी पेशेवर है और एक तकनीकी कंपनी में काम करता है। वह हार्दिक को नौकरी ढूंढने में मदद करता है। हार्दिक करीना (वंशिका धीर) के साथ डेट पर जाता है, लेकिन अचानक हालात बिगड़ने लगते हैं।

डेट के तुरंत बाद हार्दिक और बग्स एक गुप्त मिशन में शामिल हो जाते हैं। इस मिशन को मैडम एच (प्रीति जिंटा) संभाल रही हैं, जो एक गुप्त सेवा एजेंट हैं। दोनों दोस्तों को मुंबई पर होने वाले आगामी आतंकी हमले से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए कहा जाता है। हालांकि, दोनों इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं हैं और पूरी फिल्म में कई गड़बड़ियां करते रहते हैं। कहानी इन्हीं दो सामान्य लोगों और उनके सामने आए इस गुप्त मिशन से निपटने की कोशिश के इर्द-गिर्द घूमती है।

वाइब रिव्यू: कॉमेडी जासूसी कहानी से ज्यादा असरदार

फिल्म की शुरुआत काफी मजेदार अंदाज में होती है, जहां हार्दिक और बग्स लगातार मजाक करते और अजीब परिस्थितियां पैदा करते नजर आते हैं। दोनों किरदारों की केमिस्ट्री फिल्म के कुछ हिस्सों को खासा मजेदार बनाती है। कुछ वन-लाइनर और दोहरे अर्थ वाले संवाद भी अच्छा काम करते हैं। लेकिन परेशानी तब शुरू होती है, जब फिल्म कॉमेडी से एक्शन की ओर बढ़ने लगती है। जैसे ही कहानी का ध्यान कॉमेडी से हटकर आतंकवाद और एक्शन दृश्यों पर जाता है, यह बदलाव साफ महसूस होता है।

हालांकि, फिल्म के अंत तक कॉमेडी का अंदाज फिर लौट आता है, लेकिन वहां तक पहुंचने का सफर असमान है। फिल्म में मडगांव एक्सप्रेस में दिखने वाला कुणाल खेमू का पागलपन कुछ हिस्सों में नजर आता है, लेकिन यहां वह लगातार नहीं बना रहता। पटकथा कॉमेडी से रोमांस और फिर एक्शन की ओर जाती है, लेकिन ये बदलाव सहज नहीं लगते।

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कुणाल खेमू और प्रीति जिंटा ने छोड़ी छाप

कुणाल खेमू अभिनेता के तौर पर वाइब की सबसे बड़ी ताकत हैं। वह खुशमिजाज, उलझे हुए, डरे हुए और परेशान व्यक्ति के अलग-अलग भावों के बीच आसानी से बदलाव करते हैं। उनका हास्यबोध फिल्म के कुछ नीरस पलों को संभाल लेता है। बग्स के किरदार में स्पर्श श्रीवास्तव भी मजबूत प्रदर्शन करते हैं। उनका किरदार हार्दिक जितना शोरगुल वाला या अराजक नहीं है, लेकिन वह बिना किसी अतिशयोक्ति के अच्छा संतुलन बनाए रखते हैं।

प्रीति जिंटा को मैडम एच के रूप में एक अलग तरह की भूमिका मिली है, जो एक गुप्त सेवा एजेंट हैं। उनके किरदार में कई विरोधाभास हैं—वह गंभीर भी हैं और मजेदार भी। प्रीति उन्हें पर्याप्त ऊर्जा देती हैं और उनके एक्शन दृश्यों को भी प्रभावी बनाती हैं। करीना के रूप में वंशिका धीर अच्छा प्रभाव छोड़ती हैं, हालांकि उनका किरदार फिल्म के सबसे महत्वपूर्ण किरदारों में शामिल नहीं है। शर्मिला टैगोर केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में कैमियो करती हैं।

तकनीकी पक्ष और दृश्य प्रस्तुति

फिल्म की पृष्ठभूमि मुंबई है और जासूसी-कॉमेडी की दुनिया बनाने के लिए इसमें कॉमेडी, रोमांस और एक्शन का मिश्रण किया गया है। इसकी सबसे बड़ी तकनीकी समस्या स्वर का संतुलन है। बेतुकी कॉमेडी और गंभीर एक्शन कई बार ऐसा महसूस कराते हैं जैसे वे दो अलग-अलग फिल्मों का हिस्सा हों।

कुछ हिस्सों में एक्शन दृश्य जरूरत से ज्यादा जगह लेते हैं, जबकि बातचीत पर आधारित हास्य फिल्म में ज्यादा स्वाभाविक लगता है। चरम दृश्य में फिल्म फिर से कुछ मस्तमौला ऊर्जा हासिल करती है और हल्के अंदाज में खत्म होने में मदद करती है।

कमजोर पक्ष क्या हैं?

  • असमान अंदाज में बदलाव
  • अनुमान लगाने योग्य जासूसी कहानी
  • कमजोर रोमांटिक ट्रैक
  • जबरन जोड़े गए एक्शन दृश्य

क्या वाइब देखनी चाहिए?

इसे देखें अगर:

  • आपको जासूसी कॉमेडी पसंद है।
  • आपको कुणाल खेमू का हास्य पसंद है।
  • आपको दोस्ती पर आधारित कहानियां पसंद हैं।
  • आपको हल्की-फुल्की एक्शन फिल्में पसंद हैं।

इसे छोड़ सकते हैं अगर:

  • आप लगातार कॉमेडी की उम्मीद करते हैं।
  • आप गंभीर जासूसी रोमांचक फिल्म चाहते हैं।
  • आपको असमान कहानी पसंद नहीं है।
  • आपको वास्तविकता के करीब एक्शन पसंद है।

अंतिम फैसला

वाइब का विचार मनोरंजक है और फिल्म तब सबसे ज्यादा प्रभावी लगती है, जब कुणाल खेमू को कॉमेडी पर ध्यान केंद्रित करने की पूरी जगह मिलती है। हार्दिक और बग्स की दोस्ती कुछ अच्छे पल देती है, जबकि खेमू का प्रदर्शन फिल्म में जरूरी ऊर्जा बनाए रखता है।

हालांकि, जासूसी कहानी और अचानक गंभीर एक्शन की ओर बढ़ता कथानक फिल्म को असमान बना देता है। यह मडगांव एक्सप्रेस जितनी लगातार मजेदार नहीं है, लेकिन इसमें इतना हास्य, अच्छा अभिनय और अफरातफरी जरूर है कि फिल्म आगे बढ़ती रहती है।

रेटिंग: 2.5/5

कुल मिलाकर, वाइब उन दर्शकों के लिए एक बार देखने लायक फिल्म है, जिन्हें अलग अंदाज वाली जासूसी कॉमेडी और कुणाल खेमू का हास्य पसंद है। फिल्म में कुछ वाकई मजेदार पल हैं, लेकिन असमान पटकथा और बदलता अंदाज इसे लगातार मजबूत कॉमेडी बनने से रोकता है।

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