क्राइम थ्रिलर देखने वालों के लिए RAAKH सिर्फ एक और वेब सीरीज़ नहीं है। यह एक ऐसी कहानी है जो एक भयावह वास्तविक घटना से प्रेरित है और दर्शकों को उस दौर में ले जाती है, जहां एक परिवार की दुनिया अचानक बिखर जाती है। निर्देशक प्रोसित रॉय ने इस संवेदनशील विषय को सनसनीखेज बनाने के बजाय गंभीरता के साथ पेश किया है। सीरीज़ में अली फ़ज़ल, सोनाली बेंद्रे, आकाश माखिजा और रामदीप यादव अहम भूमिकाओं में हैं।

RAAKH की डिटेल्स

श्रेणीविवरण
श्रृंखला का नामराख
रिलीज की तारीख12 जून 2026
शैलीक्राइम थ्रिलर/इन्वेस्टिगेटिव ड्रामा
निर्देशकप्रोसित रॉय
लेखकअनुषा नंदकुमार, संदीप साकेत
ओटीटी प्लेटफार्मप्राइम वीडियो
मुख्य कलाकारअली फज़ल, सोनाली बेंद्रे, आकाश मखीजा, रमनदीप यादव, आमिर बशीर
रेटिंग3.5/5

RAAKH की कहानी क्या है?

कहानी 1978 की दिल्ली से शुरू होती है। अशोक अरोड़ा और मोना अरोड़ा अपने बच्चों सुमन और साहिल के गायब होने के बाद गहरे सदमे में हैं। मामला पुलिस तक पहुंचता है और जांच की जिम्मेदारी एसआई जयप्रकाश जाटव को मिलती है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, कहानी दो छोटे अपराधियों बाबू और राज्जो की तरफ भी मुड़ती है।

शुरुआत में साधारण दिखने वाले ये किरदार धीरे-धीरे कहानी का सबसे डरावना हिस्सा बन जाते हैं। सीरीज़ सिर्फ अपराध का सच जानने की कोशिश नहीं करती, बल्कि यह भी दिखाती है कि एक घटना कितनी जिंदगियों को हमेशा के लिए बदल सकती है।

जहां RAAKH सबसे ज्यादा असर छोड़ती है

इस सीरीज़ की सबसे बड़ी ताकत इसका ट्रीटमेंट है। यहां रहस्य बनाए रखने के लिए हर बात आखिरी एपिसोड तक नहीं छिपाई जाती। दर्शक कई सच जल्दी जान लेते हैं, लेकिन दिलचस्पी इस बात में बनी रहती है कि आगे क्या होगा और उसके नतीजे कितने भयावह होंगे।

कहानी अपराधियों और जांच, दोनों के नजरिए से आगे बढ़ती है। यही वजह है कि हर एपिसोड के साथ बेचैनी बढ़ती जाती है। सबसे अच्छी बात यह है कि शो अपराध को ग्लैमराइज नहीं करता। इसके बजाय पीड़ितों और उनके परिवारों के दर्द को केंद्र में रखता है।

कलाकारों ने कहानी को और मजबूत बनाया

Ali Fasal ने जांच अधिकारी के किरदार को बेहद सादगी और गंभीरता के साथ निभाया है। उनका अभिनय बनावटी नहीं लगता, जो किरदार को और विश्वसनीय बनाता है। हालांकि असली सरप्राइज आकाश माखिजा और रामदीप यादव हैं। दोनों कलाकार अपने किरदारों में इतने डूबे हुए नजर आते हैं कि कई दृश्य असहज कर देते हैं।

उनकी मौजूदगी कहानी में लगातार तनाव बनाए रखती है। Saloni Bendre का किरदार अपेक्षाकृत छोटा है, लेकिन एक मां के दर्द को उन्होंने बेहद प्रभावी तरीके से पर्दे पर उतारा है।

तकनीकी पक्ष कैसा है?

सीरीज़ का माहौल इसकी बड़ी उपलब्धियों में से एक है। 1970 के दशक की दिल्ली को काफी विश्वसनीय तरीके से दिखाया गया है। लोकेशन, कॉस्ट्यूम और सेट डिजाइन कहानी को वास्तविक महसूस कराते हैं। कैमरा वर्क और बैकग्राउंड स्कोर भी माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। कई दृश्यों में खामोशी ही सबसे ज्यादा असर छोड़ती है।

कमज़ोर पहलू क्या हैं?

  • धीमी रफ्तार
  • लंबे फ्लैशबैक
  • कुछ एपिसोड्स की असमान गति
  • परेशान करने वाला कंटेंट

क्या RAAKH देखने लायक है?

देखें अगर आप:

  • ट्रू-क्राइम ड्रामाज पसंद करते हैं
  • इन्वेस्टिगेटिव थ्रिलर्स के शौकीन हैं
  • कैरेक्टर-ड्रिवन स्टोरीटेलिंग पसंद करते हैं
  • दमदार और यथार्थवादी परफॉर्मेंस की सराहना करते हैं

न देखें अगर आप:

  • डार्क विषयों से बचना चाहते हैं
  • तेज रफ्तार थ्रिलर्स पसंद करते हैं
  • हल्का-फुल्का मनोरंजन देखना चाहते हैं
  • परेशान करने वाली क्राइम कहानियां पसंद नहीं करते।

फाइनल टेक

RAAKH उन सीरीज़ में से है जो खत्म होने के बाद भी दिमाग में बनी रहती है। यह केवल अपराध की कहानी नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे दर्द, डर और टूटे हुए जीवन की कहानी है। धीमी रफ्तार के बावजूद इसकी दमदार परफॉर्मेंस, मजबूत लेखन और गंभीर प्रस्तुति इसे देखने लायक बनाती है। अगर आपको सच्ची घटनाओं से प्रेरित क्राइम ड्रामा पसंद हैं, तो यह सीरीज़ निराश नहीं करेगी।

रेटिंग: 3.5/5