स्वरा भास्कर ने एक बार फिर संजय लीला भंसाली की फिल्म “पद्मावत” में दिखाए गए विवादित जौहर दृश्य को लेकर बहस छेड़ दी है। हाल ही में दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ‘वुमन लाइफ फ्रीडम’ नामक चर्चा में शामिल होते हुए स्वरा भास्कर ने फिल्म के अंतिम दृश्य को लेकर अपनी बात रखी।
स्वरा ने यौन हिंसा को इस तरह दिखाए जाने पर चिंता जताई कि महिला को ऐसा महसूस हो कि इस हिंसा का सामना करने के बाद उसके लिए जीवन में कुछ भी नहीं बचा है। यौन हिंसा से गुजरने के बाद महिलाओं को जीवन बचाने के बजाय मौत चुनते हुए दिखाना उन महिलाओं के लिए गलत संदेश दे सकता है, जो ऐसी हिंसा से बचकर आगे का जीवन जी रही हैं।
स्वरा भास्कर ने पद्मावत के जौहर दृश्य के संदेश पर उठाए सवाल

दर्शकों को संबोधित करते हुए स्वरा ने “पद्मावत” के आखिरी दृश्य को लेकर अपनी चिंता विस्तार से बताई। इस दृश्य में महिलाएं जौहर करने का फैसला करती हैं, क्योंकि वे पकड़े जाने और यौन हिंसा का शिकार होने से बचना चाहती हैं। स्वरा का सवाल है कि क्या सिनेमा के लिए ऐसी स्थिति में मौत को जीने से अधिक सम्मानजनक दिखाना उचित है?
स्वरा के अनुसार, इस तरह का चित्रण अनजाने में इस धारणा को मजबूत कर सकता है कि यौन हिंसा का शिकार होने के बाद महिला ने अपनी गरिमा और एक व्यक्ति के रूप में अपना महत्व खो दिया है।
अभिनेत्री पहले भी पद्मावत के चित्रण की आलोचना कर चुकी हैं
स्वरा की हालिया टिप्पणी पहली बार नहीं है, जब उन्होंने फिल्म में जौहर के चित्रण पर सवाल उठाए हैं। “पद्मावत” की रिलीज के बाद भी उन्होंने फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली को एक खुला पत्र लिखकर इस चित्रण को लेकर अपनी असहजता जाहिर की थी।
उस समय उनकी टिप्पणियों ने इतिहास के चित्रण, नारीवादी विचारधारा और फिल्म निर्माण से जुड़े फैसलों को लेकर कई बहसों को जन्म दिया था। कई साल बाद उनकी नई टिप्पणियों ने एक बार फिर इसी मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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सोशल मीडिया पर स्वरा की टिप्पणी को लेकर लोगों ने साधा निशाना

इस बहस के बीच सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने स्वरा की व्याख्या से असहमति जताई। कुछ लोगों ने उस दौर के इतिहास को लेकर उनकी समझ पर सवाल उठाए, जबकि कुछ अन्य लोगों ने जौहर के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को नहीं समझने के लिए उनकी आलोचना की।
अभिनेत्री के खिलाफ की गई कुछ टिप्पणियों में “क्या वह मूर्ख हैं?”, “आप पर शर्म आती है” और “पूरी तरह बेवकूफ” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। ये आलोचनाएं जल्द ही बड़ी बहस का हिस्सा बन गईं, हालांकि इनमें से अधिकांश टिप्पणियां रचनात्मक होने के बजाय व्यक्तिगत आलोचना पर केंद्रित थीं।
पद्मावत की बहस ने जौहर को लेकर बड़े सवाल फिर उठाए
एक बार फिर इस विवाद ने साफ कर दिया है कि भारतीय फिल्मों में जौहर के चित्रण का मुद्दा कितना जटिल है। एक पक्ष इस दृश्य को इतिहास के एक हिस्से के रूप में देखता है, जिसमें उन महिलाओं की हिंसा से बचने की कोशिश दिखाई गई है, जिन्होंने सम्मान के साथ मृत्यु को चुनने का फैसला किया। वहीं दूसरा पक्ष मानता है कि इस तरह का चित्रण आत्म-बलिदान और सम्मान से जुड़ी धारणाओं तथा यौन हिंसा के रोमांटीकरण को बढ़ावा दे सकता है।
स्वरा भास्कर की टिप्पणियों के बाद यह फिल्म एक बार फिर इस बड़े सवाल के केंद्र में आ गई है कि बीते समय की कुछ प्रथाओं और महिलाओं से जुड़े आघात तथा उनके फैसलों को फिल्मकारों को किस तरह पर्दे पर प्रस्तुत करना चाहिए।
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