इम्तियाज अली की फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि उनके किरदार सिर्फ बाहरी दुनिया की यात्रा नहीं करते, बल्कि अपने भीतर भी एक लंबा भावनात्मक सफर तय करते हैं। उनकी नई फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ भी इसी एहसास को लेकर आती है। यह फिल्म भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि में बुनी गई एक ऐसी प्रेम कहानी है, जिसमें बिछड़ने का दर्द, घर छूटने की पीड़ा और यादों की कसक गहराई से महसूस होती है।
मैं वापस आऊंगा मूवी डिटेल्स
| श्रेणी | जानकारी |
|---|---|
| फिल्म | मैं वापस आऊंगा |
| शैली | रोमांटिक ड्रामा / पीरियड फिल्म |
| निर्देशक | इम्तियाज अली |
| कलाकार | नसीरुद्दीन शाह, दिलजीत दोसांझ, वेदांग रैना, शरवरी |
| रिलीज डेट | 12 जून, 2026 |
| रेटिंग | 3.5/5 |
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी 95 वर्षीय ईशर सिंह ग्रेवाल (नसीरुद्दीन शाह) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो डिमेंशिया जैसी बीमारी से जूझ रहे हैं। उनकी याददाश्त कमजोर हो चुकी है, लेकिन लाहौर, अपना पुराना घर और जिया नाम की लड़की अब भी उनके दिल में जिंदा हैं।
ईशर का पोता निर्वैर उर्फ निवी (दिलजीत दोसांझ) लंदन से भारत आता है और दादा की टूटी-बिखरी बातों के जरिए उनके अतीत को समझने की कोशिश करता है। इसी दौरान कहानी फ्लैशबैक में जाती है, जहां युवा ईशर यानी कीनू (वेदांग रैना) और जिया (शरवरी) की मासूम प्रेम कहानी सामने आती है।
लाहौर के कॉलेज में शुरू हुआ उनका रिश्ता देश विभाजन की आग में बिखरने लगता है। हालात ऐसे बनते हैं कि दोनों एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं। वर्तमान में निवी अपने दादा की यादों के सहारे उनके अधूरे अतीत को जोड़ने की कोशिश करता है।
क्या इतने सालों बाद भी कोई रिश्ता उनका इंतजार कर रहा है? क्या बंटवारे ने सिर्फ लोगों को अलग किया या उनकी आत्मा का एक हिस्सा भी छीन लिया? फिल्म इन्हीं सवालों के जवाब तलाशती है।
Just watched #MainVaapasAaunga and I’m still struggling to find the right words.
— Abhishek Agarwal 🇮🇳 (@AbhishekOfficl) June 9, 2026
A beautifully crafted film filled with emotions, soul, and a deeply moving love story. What touched me the most is how it expresses emotions that many of us feel but often struggle to put into… pic.twitter.com/xCnb8PfpBh
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष
‘मैं वापस आऊंगा’ का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी भावनात्मक ईमानदारी है। फिल्म घर, मिट्टी और अपनेपन की उस भावना को बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाती है, जिसे शब्दों में बयान करना आसान नहीं।
इम्तियाज अली ने विभाजन की त्रासदी को सिर्फ इतिहास की घटना की तरह नहीं दिखाया, बल्कि उन लोगों की नजर से पेश किया है जिन्होंने इसे जिया था। कई दृश्य बेहद मार्मिक बन पड़े हैं, खासकर जब ईशर अपने पुराने घर और अधूरे प्यार को याद करते हैं।
फिल्म का अंतिम हिस्सा सबसे ज्यादा असर छोड़ता है। जब यह एहसास होता है कि इंसान के लिए उसका घर सिर्फ एक जगह नहीं बल्कि उसकी पहचान होता है, तब फिल्म दिल को छू जाती है।
#MainVaapasAaungaReview – Poignant, Heart-Wrenching, and Truly Timeless
— Box Office Chronicle (@BoxOffice_Truth) June 11, 2026
RATING - ⭐⭐⭐⭐
Delivering an emotionally rich, beautifully performed, and deeply moving cinematic piece, #MainVaapasAaunga serves as a poetic reminder of what true commitment and love look like when… pic.twitter.com/NJYQDyV1vU
कहां कमजोर पड़ती है फिल्म?
फिल्म का पहला भाग थोड़ा धीमा महसूस होता है। कई जगह कहानी अपनी पकड़ ढीली करती नजर आती है। कीनू और जिया की प्रेम कहानी में वह गहराई पूरी तरह नहीं बन पाती, जिसकी उम्मीद थी।
विभाजन की त्रासदी को और ज्यादा प्रभावशाली बनाया जा सकता था। कुछ भावनात्मक दृश्य असर छोड़ते हैं, लेकिन कई मौके ऐसे आते हैं जहां दर्शक पूरी तरह जुड़ नहीं पाते।
हालांकि, फिल्म की संवेदनशीलता और अभिनय इसकी कमजोरियों को काफी हद तक संभाल लेते हैं।
कलाकारों का अभिनय
नसीरुद्दीन शाह
फिल्म का सबसे मजबूत स्तंभ नसीरुद्दीन शाह हैं। उन्होंने ईशर के दर्द, अकेलेपन और बिखरती यादों को बेहद शानदार तरीके से निभाया है। यह उनके करियर की बेहतरीन परफॉर्मेंस में से एक कही जा सकती है।
दिलजीत दोसांझ
दिलजीत दोसांझ फिल्म में हल्कापन और गर्माहट लेकर आते हैं। दादा के अतीत को समझने की उनकी कोशिशें कई जगह भावुक भी करती हैं और मुस्कुराने का मौका भी देती हैं।
वेदांग रैना और शरवरी
युवा ईशर के रूप में वेदांग रैना प्रभाव छोड़ते हैं। वहीं शरवरी ने जिया के किरदार में मासूमियत और दर्द दोनों को खूबसूरती से जिया है।
तकनीकी पक्ष
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फिल्म की सिनेमेटोग्राफी शानदार है। सिल्वेस्टर फोन्सेका ने वर्तमान और अतीत के बीच की दुनिया को खूबसूरती से कैमरे में कैद किया है।
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ए.आर. रहमान का संगीत कहानी की भावनाओं को और गहराई देता है। इरशाद कामिल के गीत फिल्म के माहौल को मजबूत बनाते हैं।
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संपादन भी संतुलित है और फिल्म की धीमी लेकिन भावनात्मक गति को बनाए रखता है।
क्या आपको यह फिल्म देखनी चाहिए?
देखें अगर:
- आपको भावनात्मक प्रेम कहानियां पसंद हैं।
- विभाजन और इतिहास से जुड़ी कहानियों में रुचि है।
- धीमी लेकिन संवेदनशील फिल्में पसंद करते हैं।
- इम्तियाज अली और नसीरुद्दीन शाह के काम के प्रशंसक हैं।
छोड़ सकते हैं अगर:
- आपको तेज रफ्तार फिल्में पसंद हैं।
- भारी भावनात्मक ड्रामा देखने से बचते हैं।
- आप मसाला एंटरटेनर की उम्मीद कर रहे हैं।
Final Verdict
‘मैं वापस आऊंगा’ अधूरे प्रेम, बंटवारे के जख्म और घर की यादों से बनी एक भावनात्मक कहानी है। फिल्म में कमियां जरूर हैं, लेकिन इसकी संवेदनशीलता, खूबसूरत विजुअल्स और कलाकारों का दमदार अभिनय इसे खास बना देता है।
Rating: 3.5/5
यह फिल्म धीरे-धीरे असर छोड़ती है और खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक दर्शकों के दिल में बनी रहती है।

