महेंद्रगिरि वराही संतोष जगर्लापुडी के निर्देशन में बनी एक पौराणिक तेलुगु रोमांचक फिल्म है। इसमें सुमंत, मीनाक्षी गोस्वामी, ऐश्वर्या राजेश और मालविका नायर के साथ ब्रह्मानंदम, वेनेला किशोर और राजीव कनकला नजर आते हैं। फिल्म का तेलुगु, तमिल और हिंदी भाषाओं में 11 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में प्रदर्शन हुआ। इसकी कहानी एक ऐसे राजघराने पर केंद्रित है, जो एक अजीब श्राप से परेशान है। परिवार के पुरुष सदस्य 33 वर्ष की आयु पूरी करते ही रहस्यमय परिस्थितियों में मर जाते हैं। फिल्म की पौराणिक अवधारणा दिलचस्प है, लेकिन कहानी की गति धीमी है और पटकथा प्रभावी ढंग से तैयार नहीं की गई है।

महेंद्रगिरि वराही फिल्म की जानकारी

विवरणजानकारी
फिल्म का नाममहेंद्रगिरि वराही
रिलीज की तारीख11 सितंबर 2026
शैलीएक्शन, रोमांच, पौराणिक, रोमांचक
निर्देशकसंतोष जगर्लापुडी
लेखकस्पष्ट रूप से घोषित नहीं
निर्माताकलीपु मधु, लक्ष्मण
मुख्य कलाकारसुमंत, मीनाक्षी गोस्वामी, ऐश्वर्या राजेश, मालविका नायर, ब्रह्मानंदम, वेनेला किशोर, राजीव कनकला
ओटीटी मंचघोषित नहीं
रेटिंग2.5/5

फिल्म की अवधि लगभग 2 घंटे 34 मिनट है और इसे 11 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज किया गया।

महेंद्रगिरि वराही की कहानी

सिद्धार्थ (सुमंत) महेंद्रगिरि के राजघराने से जुड़े एक रहस्यमय मामले में फंस जाता है। करीब दो सदियों से यह परिवार एक अजीब श्राप का सामना कर रहा है, जिसके तहत परिवार के सभी पुरुष सदस्य 33 वर्ष की आयु में पहुंचने के बाद रहस्यमय परिस्थितियों में अपनी जान गंवा देते हैं। जब सिद्धार्थ अपने पूर्वजों के इतिहास की पड़ताल करता है, तो उसे पता चलता है कि इस रहस्य का गहरा संबंध देवी वराही की प्राचीन कथा से है।

कहानी राजसी इतिहास, धर्म और पौराणिक मान्यताओं की पृष्ठभूमि में आगे बढ़ती है। सिद्धार्थ यह जानने की कोशिश करता है कि पिछली पीढ़ियों का अंत कैसे हुआ और क्या वह भी इसी नियति से बच सकता है। पूरी कहानी परिवार के श्राप और देवी वराही से जुड़े आध्यात्मिक रहस्य के बीच संबंध को सामने लाने की कोशिश करती है।

महेंद्रगिरि वराही रिव्यू: शानदार विचार, लेकिन धीमी पटकथा ने रोका असर

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका मूल विचार है। 200 साल पुराने श्राप से जूझता एक राजघराना रहस्य और रोमांच से भरी पौराणिक कहानी के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है। फिल्म कहानी के इर्द-गिर्द आध्यात्मिकता और रहस्य का माहौल बनाने की कोशिश करती है और पूरी तरह पारंपरिक व्यावसायिक एक्शन शैली पर निर्भर नहीं रहती।

हालांकि, पटकथा उस हिस्से तक पहुंचने में काफी समय लेती है, जिसे फिल्म का सबसे प्रभावशाली भाग होना चाहिए। पहला भाग किरदारों और पौराणिक पहलुओं को स्थापित करने में जरूरत से ज्यादा समय लेता है, जबकि मुख्य रहस्य बहुत धीमी गति से आगे बढ़ता है। थोड़ी चुस्त पटकथा और बेहतर संपादन फिल्म को काफी प्रभावी बना सकते थे।

जैसे-जैसे रहस्य सामने आता है, कुछ घटनाओं का अनुमान लगाना आसान हो जाता है। अलौकिक तत्व दिलचस्प हैं, लेकिन फिल्म में रहस्य, भावनाओं और पौराणिक पहलुओं के बीच संतुलन पूरी तरह नहीं बन पाता। कहानी को पूरा होने में ढाई घंटे से अधिक का समय लगता है।

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सुमंत और ऐश्वर्या राजेश ने संभाली अपनी भूमिकाएं

सिद्धार्थ की भूमिका में सुमंत का अभिनय काफी संयमित है। अलौकिक शक्ति का सामना कर रहे एक सामान्य नायक की तरह व्यवहार करने के बजाय वह किरदार को शांत अंदाज में निभाते हैं और उसकी जिज्ञासा तथा डर को धीरे-धीरे सामने आने देते हैं।

ऐश्वर्या राजेश द्वारा निभाई गई वराही माता की भूमिका प्रभावशाली है और वह धार्मिक दृश्यों की गंभीरता को बढ़ाती हैं। मीनाक्षी गोस्वामी, मालविका नायर, वेनेला किशोर और राजीव कनकला समेत अन्य कलाकारों ने भी फिल्म में अपना योगदान दिया है।

संगीत और दृश्य प्रभाव

फिल्म का दृश्य पक्ष सबसे ज्यादा प्रभावी तब लगता है, जब कहानी अपने पौराणिक और आध्यात्मिक संसार में प्रवेश करती है। भक्तिमय माहौल फिल्म को एक अलग पहचान देता है और इसे सामान्य रहस्य-रोमांच वाली फिल्मों से अलग करता है।

अनूप रूबेंस का संगीत भक्तिमय दृश्यों को सहारा देता है और आध्यात्मिक वातावरण को मजबूत करता है, हालांकि यह जरूरत से ज्यादा ध्यान भटकाने वाला नहीं बनता। फिर भी फिल्म के दृश्य और वातावरण इसकी पटकथा से ज्यादा मजबूत नजर आते हैं।

कमजोर पक्ष क्या हैं?

  • धीमा पहला भाग
  • अनुमान लगाने योग्य रहस्य
  • भावनात्मक प्रभाव में असमानता
  • लंबी अवधि

क्या महेंद्रगिरि वराही देखनी चाहिए?

इसे देखें अगर आप:

  • पौराणिक रोमांचक फिल्में पसंद करते हैं।
  • अलौकिक रहस्य वाली कहानियां पसंद करते हैं।
  • सुमंत के प्रशंसक हैं।
  • भक्ति और आध्यात्मिक विषयों वाली कहानियां पसंद करते हैं।

इसे छोड़ दें अगर आप:

  • तेज गति वाली रोमांचक फिल्में चाहते हैं।
  • चुस्त पटकथा पसंद करते हैं।
  • धीमी कहानी पसंद नहीं करते।
  • लगातार रोमांच की उम्मीद रखते हैं।

अंतिम फैसला

महेंद्रगिरि वराही में पौराणिक कथाओं, राजसी इतिहास, आस्था और अलौकिक रहस्य का दिलचस्प मेल देखने को मिलता है। राजघराने से जुड़ा श्राप फिल्म को एक मजबूत शुरुआत देता है, जबकि सुमंत का संयमित अभिनय और ऐश्वर्या राजेश की मौजूदगी फिल्म को अतिरिक्त मजबूती देती है।

हालांकि, फिल्म अपनी मूल अवधारणा की पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पाती। धीमी गति, अनुमान लगाने योग्य रहस्य और खिंचे हुए भावनात्मक हिस्सों के कारण पूरा अनुभव असमान हो जाता है। फिल्म तब ज्यादा दिलचस्प लगती है, जब वह अपनी पौराणिक कहानी पर ध्यान देती है, बजाय इसके कि वह एक पारंपरिक रोमांचक फिल्म बनने की कोशिश करे।

रेटिंग: 2.5/5

कुल मिलाकर, महेंद्रगिरि वराही उन दर्शकों के लिए एक बार देखने लायक फिल्म है, जिन्हें पौराणिक रोमांच और आध्यात्मिक रहस्य वाली कहानियां पसंद हैं। इसकी अवधारणा उम्मीद जगाती है और कुछ दृश्य प्रभावशाली माहौल बनाते हैं, लेकिन पटकथा को ज्यादा चुस्त और रोचक बनाने की जरूरत थी।

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