फहाद फासिल ने डोंट ट्रबल द ट्रबल (Don't Trouble The Trouble) के साथ तेलुगु सिनेमा में बतौर सोलो लीड एक नई पारी शुरू की है। शशांक येलेती के निर्देशन में बनी यह फिल्म फैंटेसी, कॉमेडी, एडवेंचर और इमोशन को एक साथ पेश करने की कोशिश करती है। फिल्म की कहानी एक ऐसे शख्स के इर्द-गिर्द घूमती है, जो जिंदगी में आसान रास्ते और जल्दी पैसा कमाने के मौके तलाशता रहता है।

फहाद फासिल और बाल कलाकार सारा पालकर फिल्म की सबसे बड़ी खासियतों में शामिल हैं। फहाद अपने कॉमिक अंदाज और तेलुगु संवाद अदायगी से सोरी के किरदार को दिलचस्प बनाते हैं, वहीं सारा की मासूमियत फिल्म में ताजगी लेकर आती है। हालांकि, कमजोर स्क्रीनप्ले, अनुमानित कहानी और खासकर दूसरे हाफ की धीमी रफ्तार फिल्म के असर को कम कर देती है।

डोंट ट्रबल द ट्रबल फिल्म की जानकारी

कैटेगरीजानकारी
फिल्मडोंट ट्रबल द ट्रबल (Don't Trouble The Trouble)
शैलीफैंटेसी कॉमेडी
निर्देशकशशांक येलेती
मुख्य कलाकारफहाद फासिल, सारा पालकर, सौरभ सचदेवा
संगीतकाला भैरव
छायांकनब्रैड फ्रांसिस
एडिटिंगप्रवीण एंथनी
रेटिंग2.5/5
Don't Trouble the Trouble Profile
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Don't Trouble The Trouble की कहानी क्या है?

फिल्म में फहाद फासिल ने सोरी का किरदार निभाया है। अनाथ सोरी की जिंदगी का सबसे बड़ा लक्ष्य ज्यादा मेहनत किए बिना जल्दी पैसा कमाना है। इसी सोच के चलते वह एक ऐसे जाल में फंस जाता है, जहां से बाहर निकलना उसके लिए आसान नहीं होता।

एक धोखाधड़ी से जुड़े मामले के बाद सोरी की मुश्किलें बढ़ जाती हैं और उसका सामना गैंगस्टर असलम भाई से होता है। हालात ऐसे बनते हैं कि उसे तय समय के भीतर 25 लाख रुपये का इंतजाम करना पड़ता है।

पैसों की इस समस्या से निकलने के लिए सोरी हर संभव रास्ता तलाशता है। इसी दौरान उसकी मुलाकात दिव्या से होती है। दिव्या एक अमीर लड़की है और उसे लगता है कि सोरी के पास किसी तरह की जादुई शक्ति है।

सोरी को दिव्या की इस गलतफहमी का पता चलता है, लेकिन वह सच बताने के बजाय इसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने का फैसला करता है। उसे लगता है कि इस बहाने वह आसानी से पैसे कमा सकता है।

लेकिन मामला तब बदलने लगता है जब सोरी दिव्या के साथ ज्यादा समय बिताता है। उसे दिव्या की जिंदगी और उसके आसपास की परिस्थितियों से जुड़े कुछ ऐसे राज पता चलते हैं, जिनकी उसे उम्मीद नहीं थी।

इसके बाद कहानी कॉमेडी और फैंटेसी के साथ भावनात्मक पहलुओं को भी जोड़ती है। सोरी की प्राथमिकताओं में आने वाला बदलाव फिल्म की कहानी का अहम हिस्सा बन जाता है।

फहाद फासिल की एक्टिंग कैसी है?

Don't Trouble The Trouble की सबसे मजबूत कड़ी फहाद फासिल हैं। गंभीर और इंटेंस किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले फहाद यहां अपेक्षाकृत हल्के और मजेदार अंदाज में दिखाई देते हैं।

सोरी के किरदार में अभिनेता ने अपने एक्सप्रेशन, बॉडी लैंग्वेज और कॉमिक टाइमिंग का अच्छा इस्तेमाल किया है। कहानी के कुछ कमजोर हिस्सों में भी फहाद की मौजूदगी स्क्रीन पर दिलचस्पी बनाए रखती है।

फिल्म में उनकी तेलुगु डायलॉग डिलीवरी भी ध्यान खींचती है। वह किरदार के बोलने के अंदाज और व्यवहार को इस तरह पेश करते हैं कि सोरी फिल्म की दुनिया का स्वाभाविक हिस्सा महसूस होता है।

किरदार के भावनात्मक बदलाव को दिखाने में भी फहाद अच्छा काम करते हैं। शुरुआत में सोरी सिर्फ अपने फायदे और पैसों के बारे में सोचता है, लेकिन धीरे-धीरे उसके भीतर छिपी संवेदनशीलता सामने आने लगती है।

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सारा पालकर ने कैसा काम किया?

दिव्या के किरदार में सारा पालकर फिल्म को मासूमियत और फ्रेशनेस देती हैं। उनका किरदार सोरी से बिल्कुल अलग है और यही अंतर दोनों के बीच के दृश्यों को दिलचस्प बनाता है।

दिव्या की मासूमियत और जिज्ञासा को सारा सहज तरीके से पर्दे पर उतारती हैं। कहानी आगे बढ़ने के साथ जब उनके किरदार में भावनात्मक बदलाव आते हैं, तब भी उनका प्रदर्शन प्रभावी नजर आता है।

फहाद और सारा की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री भी फिल्म के कुछ हिस्सों को बेहतर बनाती है। दोनों के किरदारों की अलग-अलग सोच और व्यक्तित्व से कई हल्के-फुल्के पल पैदा होते हैं।

सौरभ सचदेवा समेत सपोर्टिंग कास्ट ने भी अपने-अपने किरदारों को कहानी की जरूरत के मुताबिक निभाया है।

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Don't Trouble The Trouble में क्या अच्छा है?

  • फहाद फासिल की एक्टिंग: कॉमेडी, एक्सप्रेशन और संवाद अदायगी फिल्म को मजबूती देते हैं।
  • सारा पालकर की मौजूदगी: उनकी मासूमियत और सहज अभिनय कहानी में ताजगी जोड़ता है।
  • अलग फैंटेसी कॉन्सेप्ट: फिल्म का बेसिक आइडिया सामान्य कॉमेडी फिल्मों से अलग नजर आता है।
  • लीड एक्टर्स की केमिस्ट्री: सोरी और दिव्या के अलग व्यक्तित्व कुछ अच्छे सीक्वेंस तैयार करते हैं।
  • इमोशनल हिस्से: दोनों किरदारों के बीच बढ़ता रिश्ता कहानी को भावनात्मक आधार देता है।
  • विजुअल ट्रीटमेंट: फैंटेसी वाले हिस्सों को स्क्रीन पर स्थापित करने की कोशिश अच्छी है।

Don't Trouble The Trouble में क्या कमजोर है?

  • अनुमानित कहानी: आगे क्या होने वाला है, इसका अंदाजा कई जगह पहले ही लग जाता है।
  • धीमी रफ्तार: कुछ दृश्यों को जरूरत से ज्यादा लंबा खींचा गया है।
  • कमजोर दूसरा हाफ: इंटरवल के बाद फिल्म की गति पहले जैसी नहीं रह जाती।
  • भावनात्मक असर सीमित: कुछ इमोशनल सीन उतना प्रभाव नहीं छोड़ते, जितना उनसे उम्मीद की जाती है।
  • कहानी की असंगति: फैंटेसी का आइडिया दिलचस्प है, लेकिन पूरी फिल्म में उसकी पकड़ एक जैसी नहीं रहती।
  • एडिटिंग की गुंजाइश: कुछ हिस्सों को छोटा किया जाता तो कहानी ज्यादा प्रभावी और तेज महसूस हो सकती थी।
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Don't Trouble The Trouble का म्यूजिक और टेक्निकल काम

  • निर्देशन: शशांक येलेती ने फैंटेसी और कॉमेडी को मिलाने की कोशिश की है, लेकिन कहानी का निष्पादन हर हिस्से में समान रूप से प्रभावी नहीं रहता।
  • म्यूजिक: काला भैरव का संगीत फिल्म के फैंटेसी और भावनात्मक माहौल को सपोर्ट करता है।
  • सिनेमैटोग्राफी: ब्रैड फ्रांसिस की सिनेमैटोग्राफी फिल्म की कल्पनात्मक दुनिया को स्क्रीन पर स्थापित करने में मदद करती है।
  • एडिटिंग: प्रवीण एंथनी की एडिटिंग कहानी को आगे बढ़ाती है, हालांकि कुछ हिस्सों में और कसाव की जरूरत महसूस होती है।
  • प्रोडक्शन डिजाइन: फिल्म की फैंटेसी दुनिया को एक अलग विजुअल पहचान देने में प्रोडक्शन डिजाइन की भूमिका अहम है।
  • ओवरऑल टेक्निकल वर्क: तकनीकी पक्ष कलाकारों के प्रदर्शन और कहानी को सपोर्ट करता है, हालांकि यह कमजोर स्क्रीनप्ले की भरपाई पूरी तरह नहीं कर पाता।

Don't Trouble The Trouble Review: फाइनल वर्डिक्ट

Don't Trouble The Trouble एक अलग तरह की फैंटेसी कॉमेडी पेश करने की कोशिश करती है और फिल्म को सबसे ज्यादा फायदा फहाद फासिल के प्रदर्शन से मिलता है। उनका कॉमिक अंदाज, तेलुगु डायलॉग डिलीवरी और किरदार के भावनात्मक पक्ष को संभालने का तरीका फिल्म को देखने लायक हिस्से देता है।

सारा पालकर भी दिव्या के रूप में अपनी छाप छोड़ती हैं। उनकी मासूमियत और फहाद के किरदार की चालाकी के बीच का अंतर कहानी को कई अच्छे पल देता है।

हालांकि, फिल्म की सबसे बड़ी समस्या इसकी कहानी और गति है। स्क्रीनप्ले कई जगह अनुमानित हो जाता है और दूसरा हाफ अपेक्षाकृत धीमा महसूस होता है। कुछ भावनात्मक और फैंटेसी सीक्वेंस भी उतना प्रभाव नहीं पैदा कर पाते, जितना फिल्म उनसे उम्मीद करती है।

कुल मिलाकर, Don't Trouble The Trouble में एक दिलचस्प विचार और अच्छे कलाकार हैं, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले और असमान गति के कारण यह शुरुआत से अंत तक समान स्तर का मनोरंजन देने में कामयाब नहीं हो पाती।

डोंट ट्रबल द ट्रबल रेटिंग: 2.5/5

Pros

  • शानदार परफॉर्मेंस
  • अलग कॉन्सेप्ट

Cons

  • अनुमानित कहानी
  • धीमी रफ्तार

क्या आपको डोंट ट्रबल द ट्रबल देखनी चाहिए?

अगर आपको फहाद फासिल की एक्टिंग, फैंटेसी कॉमेडी और अलग तरह की तेलुगु फिल्में पसंद हैं, तो Don't Trouble The Trouble में आपके लिए कुछ दिलचस्प हिस्से मौजूद हैं। फहाद की कॉमिक टाइमिंग और सारा पालकर की मासूमियत फिल्म को कई अच्छे पल देती है।

हालांकि, अगर आप एक तेज रफ्तार और पूरी तरह कसाव वाली फैंटेसी फिल्म की उम्मीद कर रहे हैं, तो स्क्रीनप्ले की कमियां और दूसरा हाफ आपको निराश कर सकता है।

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