धूमकेतु मलयालम फैंटेसी कॉमेडी फिल्म है, जिसका निर्देशन सुधी मैडिसन ने किया है। फिल्म में साजिन गोपू, निखिला विमल, गणपति, शाइन टॉम चाको और सिद्धार्थ भरतन मुख्य भूमिकाओं में हैं। कहानी कुट्टन नाम के एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी शादी के तुरंत बाद एक अजीब टाइम लूप में फंस जाता है।

हर बार उसकी मौत होती है और वह अपनी शादी की सुबह फिर जाग जाता है। इसके बाद उसे उसी दिन को बार-बार जीना पड़ता है। विचार दिलचस्प है और कलाकारों को कई मजेदार पल मिलते हैं, लेकिन बार-बार दोहराए जाने वाले घटनाक्रम के कारण फिल्म धीरे-धीरे अपने ही टाइम लूप में फंसी हुई महसूस होने लगती है।

धूमकेतु फिल्म की जानकारी

फिल्म का नामधूमकेतु
रिलीज की तारीख25 सितंबर 2026
शैलीफैंटेसी/कॉमेडी/थ्रिलर
निर्देशकसुधी मैडिसन
लेखकसॉनी बाबू एंटनी, मनु मधुसूदनन
निर्मातासमीर ताहिर, शायजू खालिद, साजिन अली, अब्बास थिरुनवाया
मुख्य कलाकारसाजिन गोपू, निखिला विमल, गणपति
ओटीटी प्लेटफॉर्मघोषणा नहीं हुई
रेटिंग2.5/5

धूमकेतु को 25 सितंबर 2026 को मलयालम सिनेमाघरों में रिलीज किया गया। फिल्म टाइम लूप की अवधारणा पर आधारित है और इसमें फैंटेसी, कॉमेडी, रहस्य और थ्रिलर के तत्वों को मिलाया गया है।

धूमकेतु की कहानी

लाथिन कुमार यानी कुट्टन (साजिन गोपू) उस समय बेहद खुश होता है, जब उसकी शादी शरमिला (निखिला विमल) से होती है, जिससे वह सच्चा प्यार करता है। लेकिन उसकी खुशी ज्यादा देर नहीं टिकती। शादी की रात अचानक कुछ नकाबपोश लोग वहां पहुंचते हैं, कुट्टन की हत्या कर देते हैं और शरमिला को अपने साथ ले जाते हैं।

कहानी यहीं खत्म होने के बजाय कुट्टन को अपनी शादी की सुबह फिर से जागते हुए दिखाती है। धीरे-धीरे उसे एहसास होता है कि वही घटनाएं दोबारा हो रही हैं और वह एक अजीब टाइम लूप में फंस चुका है। अब उसे यह समझना है कि आखिर उसके साथ क्या हो रहा है और इस चक्र को तोड़ने का रास्ता क्या है। कहानी का बाकी हिस्सा कुट्टन की उन कोशिशों पर केंद्रित है, जिनमें वह शादी वाले दिन होने वाली घटनाओं को बदलने और नकाबपोश हमलावरों के पीछे छिपे रहस्य को उजागर करने की कोशिश करता है।

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धूमकेतु में मजेदार अभिनय, लेकिन क्या दोहराव वाली कहानी कमजोर करती है?

धूमकेतु की सबसे बड़ी ताकत इसका मूल विचार है। शादी के इर्द-गिर्द टाइम लूप की कहानी तैयार करने से फिल्म को परिस्थितिजन्य कॉमेडी के कई मौके मिलते हैं। केरल की परिचित पृष्ठभूमि भी कुट्टन की दुनिया से जुड़ने में मदद करती है। फिल्म का पहला भाग इस विचार को ठीक तरह से स्थापित करता है और टाइम लूप को जरूरत से ज्यादा जटिल बनाए बिना कहानी आगे बढ़ाता है।

समस्या तब शुरू होती है, जब फिल्म बिना पर्याप्त नया तनाव या हास्य जोड़े उन्हीं परिस्थितियों को बार-बार दोहराने लगती है। शादी के कई दृश्य बार-बार दिखाए जाते हैं, जबकि दर्शक पहले ही समझ चुके होते हैं कि स्थिति क्या है। पटकथा कुट्टन और शरमिला के रिश्ते के भावनात्मक पक्ष को भी पर्याप्त रूप से विकसित नहीं कर पाती, जिससे निखिला विमल के किरदार में गहराई कम रह जाती है। साजिन गोपू कॉमेडी वाले हिस्सों में सहज नजर आते हैं और अच्छी ऊर्जा के साथ कुट्टन के किरदार को संभालते हैं।

निखिला विमल अपनी भूमिका में अच्छी तरह फिट बैठती हैं, जबकि गणपति अपने हाव-भाव और शारीरिक अभिनय के जरिए फिल्म के कुछ बेहतरीन पलों को सामने लाते हैं और कई जगह सबसे ज्यादा प्रभाव छोड़ते हैं। शाइन टॉम चाको और सहायक कलाकार फिल्म के अराजक माहौल को बढ़ाते हैं। तकनीकी काम भी ठीक है। अंकित मेनन का संगीत फिल्म के हल्के-फुल्के माहौल को सहारा देता है, जबकि विवेक हर्षन का संपादन कहानी में कुछ गति बनाए रखने में मदद करता है। हालांकि, पटकथा टाइम लूप की संरचना का हमेशा बेहतर इस्तेमाल नहीं कर पाती।

क्या हैं फिल्म की कमजोरियां?

  • शादी के दृश्यों का बार-बार दोहराव
  • किरदारों के विकास में कमी
  • असमान हास्य
  • कमजोर खलनायक की कहानी

क्या धूमकेतु देखनी चाहिए?

इसे देखें अगर आप:

  • टाइम लूप वाली कहानियां पसंद करते हैं।
  • मलयालम कॉमेडी पसंद करते हैं।
  • साजिन गोपू की फिल्में देखते हैं।
  • अनोखे विचारों वाली फिल्में पसंद करते हैं।

इसे छोड़ सकते हैं अगर आप:

  • लगातार रोमांच की उम्मीद करते हैं।
  • दोहराव वाली कहानी पसंद नहीं करते।
  • किरदारों के मजबूत विकास की उम्मीद करते हैं।
  • कसावट वाली थ्रिलर पसंद करते हैं।

अंतिम फैसला

धूमकेतु का विचार अनोखा है और कलाकारों की टोली मजेदार पल पैदा करना जानती है, खासकर साजिन गोपू और गणपति। परिचित माहौल और अनोखा टाइम लूप वाला विचार भी फिल्म को अपनी अलग पहचान देता है। हालांकि, पटकथा बार-बार उन्हीं परिस्थितियों पर लौटती रहती है और उन्हें पर्याप्त रूप से विकसित नहीं करती। इसका असर धीरे-धीरे फिल्म के मूल विचार पर भी पड़ने लगता है।

अगर आपको अनोखी मलयालम कॉमेडी पसंद है, तो यह एक बार हल्के-फुल्के मनोरंजन के लिए देखी जा सकती है। हालांकि, ज्यादा कसी हुई पटकथा और मजबूत किरदारों के साथ यह फिल्म कहीं ज्यादा प्रभावी हो सकती थी।

रेटिंग: 2.5/5

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