इमरान हाशमी की फिल्म ‘आवारापन 2’ सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। करीब 19 साल बाद शिवम पंडित का किरदार पर्दे पर वापस आया है। फिल्म पहली ‘आवारापन’ की कहानी और भावनाओं को आगे बढ़ाती है, लेकिन सवाल यही है कि क्या सीक्वल उस पुराने चार्म को दोबारा हासिल कर पाता है? जवाब है- काफी हद तक हां। फिल्म में इमोशन, एक्शन और क्राइम का अच्छा मेल देखने को मिलता है और इमरान एक बार फिर अपने पुराने अंदाज में प्रभावित करते हैं।

आवारापन 2: फिल्म डिटेल्स

फिल्मआवारापन 2
मुख्य कलाकारइमरान हाशमी, दिशा पाटनी, पूरब गब्बी, शबाना आजमी, मायरा शिवन
निर्देशकनितिन कक्कड़
लेखकविशेष भट्ट
शैलीएक्शन, क्राइम, ड्रामा
संगीतविभिन्न कलाकार
बैकग्राउंड म्यूजिकराजू सिंह
भाषाहिंदी
अवधिलगभग 2 घंटे 20 मिनट
रिलीज14 अगस्त 2026
रेटिंग⭐⭐⭐⭐

‘आवारापन 2’ की कहानी: शिवम के सामने है एक नई जंग

‘आवारापन 2’ की कहानी पहली फिल्म के घटनाक्रम से आगे बढ़ती है। शिवम पंडित की जिंदगी में बहुत कुछ बदल चुका है, लेकिन अतीत की यादें अब भी उसके साथ हैं। अपनी प्रेमिका आलिया को खोने के बाद उसकी जिंदगी में एक ऐसी बच्ची आती है, जिसका नाम वह आलिया रखता है।

शिवम उस बच्ची को उसी अनाथालय में रखता है, जहां उसका अपना बचपन बीता था। वक्त गुजरता है और आलिया को एक दंपति गोद ले लेता है। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लगता है, लेकिन जल्द ही शिवम को पता चलता है कि बच्ची को मानव तस्करी के एक खतरनाक नेटवर्क में बेच दिया गया है।

अब शिवम के सामने सिर्फ एक बच्ची को बचाने की चुनौती नहीं है, बल्कि उसे उन तमाम बच्चों को भी बचाना है जो इस अपराध के जाल में फंसे हुए हैं। वह इंटरपोल के एक अधिकारी के साथ बैंकॉक पहुंचता है, जहां उसका सामना ड्रग्स के कारोबार से जुड़े ताकतवर लोगों से होता है।

यहीं उसकी मुलाकात जोरावर, जारा, सिकंदर और नफीसा जैसे किरदारों से होती है। इसके बाद कहानी शिवम की एक ऐसी लड़ाई बन जाती है, जिसमें उसके लिए किसी मासूम की जिंदगी बचाना ही सबसे बड़ा मकसद है।

‘आवारापन 2’ मूवी रिव्यू: इमोशन और एक्शन का दमदार संतुलन

निर्देशक नितिन कक्कड़ ने फिल्म को सिर्फ एक्शन के भरोसे नहीं छोड़ा है। कहानी में भावनात्मक पहलू को भी पर्याप्त जगह दी गई है। यही वजह है कि फिल्म के कई एक्शन सीक्वेंस सिर्फ मारधाड़ नहीं लगते, बल्कि कहानी को आगे बढ़ाने का काम करते हैं।

फिल्म का पहला हाफ खास तौर पर मजबूत है। शुरुआत से ही कहानी में एक उद्देश्य दिखाई देता है और शिवम का मिशन दर्शकों को उसके साथ जोड़ता है। इंटरवल से पहले फिल्म की रफ्तार बनी रहती है और इमोशनल तथा एक्शन सीन्स के बीच संतुलन भी अच्छा है।

दूसरे हाफ में कुछ जगह कहानी थोड़ी धीमी पड़ती है। कुछ सीन ऐसे भी हैं जिन्हें थोड़ा छोटा किया जा सकता था। हालांकि, फिल्म ज्यादा देर तक अपनी पकड़ नहीं खोती और फिर कहानी दोबारा गति पकड़ लेती है।

सबसे अच्छी बात यह है कि फिल्म बार-बार पहली ‘आवारापन’ की याद दिलाने के बावजूद उसकी कॉपी बनने की कोशिश नहीं करती। पुराने किरदार और घटनाएं नई कहानी में इस तरह शामिल की गई हैं कि दोनों फिल्मों के बीच एक कड़ी बनी रहती है।

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इमरान हाशमी ने फिर जीता दिल, शिवम के किरदार में दिखा पुराना अंदाज

इमरान हाशमी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। शिवम पंडित के किरदार में वह एक बार फिर उसी गंभीर और रफ-टफ अंदाज में नजर आते हैं, जिसे दर्शकों ने उनके करियर के शुरुआती दौर में खूब पसंद किया था।

उनके एक्शन सीन्स में आत्मविश्वास दिखाई देता है, तो भावनात्मक दृश्यों में वह किरदार के दर्द को भी प्रभावी तरीके से सामने रखते हैं। शिवम के गुस्से, बेबसी और किसी मासूम को बचाने की जिद के बीच इमरान ने अच्छा संतुलन बनाया है।

अगर आपने इमरान को ‘मर्डर’ और ‘जहर’ जैसी फिल्मों के दौर में पसंद किया है, तो शिवम पंडित का यह अवतार निश्चित रूप से आपको पुरानी यादों में ले जाएगा।

Emraan Hashmi Profile
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दिशा पाटनी से पूरब गब्बी तक, कैसी रही स्टारकास्ट की परफॉर्मेंस?

पूरब गब्बी ने जोरावर के किरदार में अच्छा प्रभाव छोड़ा है। उनका किरदार कहानी में खतरा पैदा करता है और अभिनेता ने उसे प्रभावी तरीके से निभाया है। हालांकि, अगर जोरावर को थोड़ा और क्रूर और खतरनाक दिखाया जाता तो विलेन का असर और मजबूत हो सकता था।

दिशा पाटनी जारा की भूमिका में हैं। उनके किरदार में करने के लिए बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन जो मौका मिला है, उसमें उन्होंने ईमानदार कोशिश की है।

शबाना आजमी नफीसा के किरदार में दिखाई देती हैं। उनकी मौजूदगी फिल्म की स्टार पावर बढ़ाती है, लेकिन स्क्रीन टाइम सीमित होने के कारण उनका किरदार पूरी क्षमता से सामने नहीं आ पाता।

बाल कलाकार मायरा शिवन ने आलिया के रूप में अच्छा काम किया है। वहीं सुविंदर विक्की, वैजयंती कोहली और अनिरुद्ध रावल भी अपनी भूमिकाओं में सहज नजर आते हैं।

Awarapan 2 Profile
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लेखन और निर्देशन: पहली ‘आवारापन’ से कितनी जुड़ी है कहानी?

लेखक विशेष भट्ट ने पहली फिल्म की भावनात्मक विरासत को नई कहानी से जोड़ने की अच्छी कोशिश की है। फिल्म में पुराने संदर्भों का इस्तेमाल सिर्फ नॉस्टैल्जिया पैदा करने के लिए नहीं किया गया, बल्कि उन्हें कहानी का हिस्सा बनाया गया है।

शिवम का अतीत, आलिया से उसका जुड़ाव और उसका इंसानियत के लिए लड़ने का जज्बा दूसरी फिल्म में भी कायम रहता है।

कहानी पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं है। कई मोड़ ऐसे हैं जिन्हें दर्शक पहले ही भांप सकते हैं। इसके बावजूद भावनात्मक दृश्यों और एक्शन की वजह से कहानी दिलचस्प बनी रहती है।

निर्देशक नितिन कक्कड़ ने फिल्म के टोन को गंभीर रखा है और पहली फिल्म की दुनिया से उसका रिश्ता भी बनाए रखा है। कुछ जगहों पर अगर कहानी की गति और दृश्यों की बारीकियों पर थोड़ा और काम होता, तो प्रभाव और बेहतर हो सकता था।

एक्शन और इमोशन का शानदार मेल, लेकिन कुछ जगह चूक

फिल्म के एक्शन सीन्स कहानी के साथ जुड़े हुए हैं, इसलिए वे जबरन डाले गए नहीं लगते। शिवम का एक्शन अवतार फिल्म के प्रशंसकों को खास तौर पर पसंद आ सकता है।

वहीं, इमोशनल दृश्यों में फिल्म ज्यादा असरदार नजर आती है। शिवम और आलिया का रिश्ता कहानी को भावनात्मक आधार देता है।

हालांकि, कुछ दृश्यों में लॉजिक और डिटेलिंग की कमी खटकती है। उदाहरण के तौर पर, जिस तरह कुछ परिस्थितियों को पर्दे पर दिखाया गया है, वहां थोड़ी ज्यादा वास्तविकता और बारीकी की जरूरत महसूस होती है।

म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर: पुरानी यादें ताजा करता है संगीत

फिल्म में पहली ‘आवारापन’ के लोकप्रिय गाने ‘तेरा मेरा रिश्ता’ की धुन का नया इस्तेमाल किया गया है। यह पुराने प्रशंसकों के लिए नॉस्टैल्जिया पैदा करता है और दोनों फिल्मों को भावनात्मक रूप से जोड़ने का काम करता है।

हालांकि, नई फिल्म के गाने पहली फिल्म की तरह लंबे समय तक याद रह जाने वाले नहीं हैं। इस मामले में सीक्वल थोड़ा पीछे रह जाता है।

जुबिन नौटियाल का ‘लाडो’ जरूर दिल को छूता है और फिल्म के भावनात्मक माहौल को मजबूत करता है। वहीं राजू सिंह का बैकग्राउंड स्कोर कहानी के क्राइम और एक्शन टोन के साथ अच्छी तरह मेल खाता है।

‘आवारापन 2’ की सबसे बड़ी खूबियां क्या हैं?

  • इमरान हाशमी का दमदार अभिनय
  • पहली फिल्म से मजबूत कनेक्शन
  • इमोशनल कहानी
  • एक्शन और ड्रामा का संतुलन
  • शिवम का पुराना गैंगस्टर अंदाज
  • जुबिन नौटियाल का ‘लाडो’
  • राजू सिंह का प्रभावी बैकग्राउंड स्कोर

कहां कमजोर पड़ती है ‘आवारापन 2’?

  • संगीत पहली फिल्म जैसा यादगार नहीं है।
  • कुछ जगह कहानी की रफ्तार धीमी पड़ती है।
  • विलेन को और ज्यादा खतरनाक बनाया जा सकता था।
  • कुछ दृश्यों में डिटेलिंग की कमी दिखाई देती है।
  • दिशा पाटनी और शबाना आजमी के किरदारों को सीमित स्पेस मिला है।

क्या ‘आवारापन 2’ सिनेमाघर में देखने लायक है?

अगर आपको पहली ‘आवारापन’ पसंद आई थी और आप इमरान हाशमी को उनके पुराने एक्शन-क्राइम अंदाज में देखना चाहते हैं, तो ‘आवारापन 2’ आपके लिए एक अच्छा विकल्प है।

फिल्म पूरी तरह परफेक्ट नहीं है। संगीत और कुछ कमजोर दृश्यों के अलावा कहानी में कई जगह अनुमान लगाया जा सकता है। लेकिन इमरान की परफॉर्मेंस, भावनात्मक कहानी, एक्शन और पहली फिल्म से जुड़ाव इसकी कमियों पर काफी हद तक भारी पड़ते हैं।

प्लस पॉइंट्स

  • इमरान हाशमी
  • इमोशनल कहानी
  • दमदार एक्शन
  • पुरानी फिल्म से कनेक्शन

माइनस पॉइंट्स

  • कमजोर म्यूजिक
  • कुछ धीमे दृश्य

‘आवारापन 2’ का फाइनल वर्डिक्ट: पुराना चार्म लौटा या नहीं?

‘आवारापन 2’ अपने मूल फिल्म के चार्म को पूरी तरह दोहराने के बजाय उसे नए संदर्भ में आगे बढ़ाने की कोशिश करती है और इसमें काफी हद तक सफल भी रहती है। इमरान हाशमी शिवम पंडित के किरदार में एक बार फिर जान डाल देते हैं।

फिल्म का इमोशनल पक्ष और एक्शन दर्शकों को बांधे रखते हैं। कुछ कमियां जरूर हैं, लेकिन ‘आवारापन’ के प्रशंसकों के लिए यह सीक्वल एक संतोषजनक वापसी साबित हो सकता है।

रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐/5

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