कॉमेडियन समय रैना और यूट्यूबर्स रणवीर इलाहाबादिया तथा आशीष चंचलानी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए तीनों पर ₹3-3 लाख का जुर्माना लगाया है। अदालत ने यह कार्रवाई अपने पहले दिए गए निर्देशों का पालन न करने पर की। यह मामला "इंडियाज़ गॉट लेटेंट" में स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) और दिव्यांगजनों को लेकर की गई टिप्पणियों के खिलाफ क्योर SMA इंडिया फाउंडेशन द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है।

जुर्माने के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिए गए आश्वासनों का पालन न किए जाने पर गंभीर चिंता भी जताई। इसके अलावा अदालत ने दिव्यांगजनों और SMA से जुड़े जागरूकता कार्यक्रमों को लेकर भी कई निर्देश जारी किए।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देशों का पालन न करने पर जताई नाराजगी

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा कि समय रैना, रणवीर इलाहाबादिया और आशीष चंचलानी ने अदालत के पहले दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग यह नहीं मान सकते कि वे कानून से ऊपर हैं। अदालत के समक्ष किए गए वादों का पूरी ईमानदारी से पालन किया जाना चाहिए।

समय रैना पर अदालत की सबसे सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से समय रैना के आचरण पर आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि उन्होंने पहले दिए गए उस निर्देश का पालन नहीं किया, जिसमें दिव्यांगजनों को अपने कार्यक्रम में आमंत्रित करने की बात कही गई थी।

पीठ ने कहा कि ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है कि समय रैना ने अदालत के समक्ष किए गए अपने वादों को पूरा किया। यह टिप्पणी अदालत के आदेश का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।

दिव्यांगजनों के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाने का निर्देश

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अदालत ने तीनों कंटेंट क्रिएटर्स पर ₹3-3 लाख का जुर्माना लगाने के साथ यह भी निर्देश दिया कि वे हर महीने दो कार्यक्रम प्रसारित करें, जिनमें दिव्यांगजनों की उपलब्धियों और उनकी सफलता की कहानियों को प्रमुखता से दिखाया जाए।

अदालत के अनुसार, इसका उद्देश्य दिव्यांगजनों और स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) जैसी बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

"इंडियाज़ गॉट लेटेंट" विवाद से जुड़ा है मामला

यह मामला क्योर SMA इंडिया फाउंडेशन की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें "इंडियाज़ गॉट लेटेंट" शो में SMA के इलाज के खर्च और दिव्यांगजनों को लेकर किए गए कथित मजाक पर आपत्ति जताई गई थी।

अपने ताजा आदेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक हस्तियों की बातों और उनके व्यवहार की सामाजिक जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।