बॉलीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा के पति और आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा हाल ही में हरिद्वार में आयोजित एक विशेष धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होकर चर्चा का विषय बन गए। उन्होंने श्री साई शिव गंगा धाम में आयोजित 5211 किलोग्राम वजनी विशाल पारद शिवलिंग के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग लिया। इस भव्य आयोजन में देशभर से हजारों श्रद्धालु, साधु-संत और आध्यात्मिक साधक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विश्व शांति, मानव कल्याण और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश फैलाना था।

बताया जा रहा है कि इस अद्भुत पारद शिवलिंग के निर्माण में लगभग दस वर्षों का समय लगा। इसे तैयार करने के लिए पारा, चांदी, सोना और 108 प्रकार की जड़ी-बूटियों के अर्क का उपयोग किया गया है। समारोह में पहुंचकर राघव चड्ढा ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान वे पूरी तरह आध्यात्मिक माहौल में डूबे नजर आए। कार्यक्रम में कई प्रमुख संतों और धार्मिक हस्तियों ने भी हिस्सा लिया और समाज में सद्भाव तथा सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

समारोह में जुटीं कई प्रमुख हस्तियां

इस विशेष अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी जी महाराज, श्री सुधांशु जी महाराज, साध्वी ऋतंभरा जी, आचार्य मनीष जी, कैलाशानंद गिरी जी महाराज, अवधेशानंद गिरी जी महाराज और स्वामी रविन्द्र पुरी जी महाराज समेत कई प्रतिष्ठित संत उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान आयोजकों और अतिथियों ने आध्यात्मिक मूल्यों को समाज तक पहुंचाने और लोगों को धर्म व सेवा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।

आयोजन से जुड़े राजीव बंसल ने इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताते हुए कहा कि उन्हें साईं बाबा के आशीर्वाद से इस सेवा कार्य का हिस्सा बनने का अवसर मिला। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता में योगदान देने वाले सभी संतों, श्रद्धालुओं और स्वयंसेवकों का आभार भी व्यक्त किया।

दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण पर भी दिया गया जोर

धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों को भी प्रमुखता दी गई। समारोह में दिव्यांग इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (DICCAI) द्वारा दिव्यांगजनों के आर्थिक सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के प्रयासों पर विशेष चर्चा की गई। आयोजन से जुड़े कई समाजसेवियों और उद्योगपतियों ने इस पहल का समर्थन करते हुए दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सहयोग का संकल्प लिया।

धार्मिक आस्था, सामाजिक सेवा और मानव कल्याण के संदेश से जुड़े इस भव्य आयोजन ने न केवल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ जोड़ने का भी काम किया।