हिंदी सिनेमा जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। मशहूर फिल्म निर्माता और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी का 76 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके जाने से बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ गई है। फिल्म निर्माण से लेकर सेंसर बोर्ड के प्रमुख के रूप में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई थी।

लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पहलाज निहलानी पिछले काफी समय से लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। स्वास्थ्य लगातार बिगड़ने के कारण उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म जगत के कई कलाकारों और निर्माताओं ने शोक व्यक्त किया है।

निर्माता के तौर पर बनाई कई यादगार फिल्में

पहलाज निहलानी ने अपने करियर की शुरुआत बतौर निर्माता 1980 में रिलीज हुई फिल्म हथकड़ी से की थी। इसके बाद उन्होंने कई सफल और चर्चित फिल्मों का निर्माण किया। उनकी फिल्मों में आंधी-तूफान, शोला और शबनम, आंखें और अंदाज जैसी फिल्में शामिल हैं। खासतौर पर गोविंदा और अक्षय कुमार के करियर की कुछ महत्वपूर्ण फिल्मों के निर्माण में उनका बड़ा योगदान रहा।

Pahlaj Nihalani Profile
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सेंसर बोर्ड में लिए गए फैसलों से रहे चर्चा में

फिल्म निर्माता होने के अलावा पहलाज निहलानी को सेंसर बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष के रूप में भी याद किया जाएगा। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए, जिन पर देशभर में बहस छिड़ गई थी।

सबसे ज्यादा चर्चा तब हुई जब उन्होंने शाहिद कपूर और आलिया भट्ट अभिनीत फिल्म उड़ता पंजाब में कई कट लगाने की सिफारिश की थी। बताया जाता है कि फिल्म के दर्जनों दृश्यों और संवादों पर आपत्ति जताई गई थी। इसके अलावा लिपस्टिक अंडर माय बुर्खा को लेकर भी उनका रुख काफी विवादों में रहा। फिल्मों में बढ़ते बोल्ड कंटेंट और किसिंग सीन्स को लेकर भी उन्होंने सख्त विचार व्यक्त किए थे।

Pahlaj Nihalani Profile
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आज होगा अंतिम संस्कार

परिवार और करीबी सूत्रों के अनुसार पहलाज निहलानी का अंतिम संस्कार गुरुवार दोपहर 3 बजे मुंबई के सांताक्रूज श्मशान घाट में किया जाएगा। उनके अंतिम दर्शन के लिए फिल्म इंडस्ट्री के कई दिग्गजों के पहुंचने की संभावना है।

एक युग का हुआ अंत

पहलाज निहलानी उन फिल्म निर्माताओं में गिने जाते थे जिन्होंने व्यावसायिक सिनेमा में अपनी अलग छाप छोड़ी। वहीं सेंसर बोर्ड में उनकी कार्यशैली हमेशा चर्चा का विषय बनी रही। उनके निधन के साथ हिंदी सिनेमा ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसने दशकों तक फिल्म उद्योग में सक्रिय भूमिका निभाई। उनकी बनाई फिल्मों और उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।