साउथ और बॉलीवुड की चर्चित अभिनेत्री तमन्ना भाटिया एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनकी फिल्म नहीं बल्कि एक कानूनी मामला है। मद्रास हाईकोर्ट ने उनकी 1 करोड़ रुपये की मुआवजे वाली याचिका को खारिज कर दिया है, जिससे एक्ट्रेस को बड़ा झटका लगा है।

क्या था पूरा मामला?

रिपोर्ट्स के अनुसार, तमन्ना भाटिया ने ‘पावर सोप्स लिमिटेड’ पर आरोप लगाया था कि कंपनी ने कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद भी उनके नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल अपने प्रोडक्ट्स के प्रमोशन में जारी रखा।

Tamannaah Bhatia Profile
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एक्ट्रेस का कहना था कि यह उनके पर्सनालिटी राइट्स का उल्लंघन है। इसी आधार पर उन्होंने कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा और 1 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा।

निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट तक

इस मामले में सबसे पहले उन्होंने निचली अदालत का रुख किया, लेकिन वहां उनकी याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट में अपील दाखिल की, जहां उन्होंने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी।

हालांकि, हाईकोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिली और उनकी अपील को खारिज कर दिया गया।

कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

मद्रास हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि:

  • निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं
  • एक्ट्रेस की ओर से कोई ठोस और नए सबूत पेश नहीं किए गए
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इन्हीं कारणों के चलते अदालत ने उनकी अपील को खारिज कर दिया और 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग भी समाप्त हो गई।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

यह विवाद साल 2008 से जुड़ा है, जब तमन्ना भाटिया ने ‘पावर सोप्स लिमिटेड’ के साथ एक विज्ञापन समझौता किया था, जो 2009 तक वैध था।

बताया जाता है कि 2010 के अंत में एक्ट्रेस को पता चला कि कंपनी अब भी उनके पुराने विज्ञापनों का इस्तेमाल कर रही है। इसके बाद उन्होंने जनवरी और फरवरी 2011 में कंपनी को नोटिस भेजे, लेकिन जवाब नहीं मिलने पर मामला कोर्ट तक पहुंच गया।

क्या है इस फैसले का असर?

इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि बिना मजबूत सबूतों के ऐसे मामलों में अदालत से राहत मिलना मुश्किल होता है। साथ ही, यह मामला सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और पर्सनालिटी राइट्स से जुड़े कानूनी पहलुओं को भी उजागर करता है।

यह मामला भले ही तमन्ना भाटिया के लिए निराशाजनक रहा हो, लेकिन यह इंडस्ट्री के लिए एक अहम कानूनी मिसाल जरूर बन सकता है।