हाइब के वीवर्स कॉन फेस्टिवल इंडिया विज्ञापन पर विवाद, भारतीय के-पॉप प्रशंसकों ने लगाए नस्लवाद के आरोप

दक्षिण कोरिया की दिग्गज मनोरंजन कंपनी हाइब को आगामी वीवर्स कॉन फेस्टिवल इंडिया के प्रचार विज्ञापन को लेकर भारतीय के-पॉप प्रशंसकों की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। संगीत कार्यक्रम को लेकर उत्साह बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किए गए इस अभियान पर नस्लवाद और सांस्कृतिक असंवेदनशीलता के आरोप लगने लगे हैं। कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं का मानना है कि विज्ञापन में भारतीय भोजन और मनोरंजन को उबाऊ दिखाया गया है, जबकि कोरियाई संस्कृति को ज्यादा रोमांचक तरीके से पेश किया गया है। यह विवाद नई दिल्ली में प्रस्तावित महोत्सव की शुरुआत से कई महीने पहले सामने आया है।

हाइब के वीवर्स कॉन फेस्टिवल इंडिया विज्ञापन पर छिड़ा विवाद

प्रचार वीडियो में रिया नाम की एक युवा भारतीय के-पॉप प्रशंसक की कहानी दिखाई गई है, जिसमें बताया गया है कि कोरियाई संगीत में उसकी रुचि रोजमर्रा की जिंदगी को कैसे रोमांचक बनाती है। हालांकि, विज्ञापन में भारतीय और कोरियाई सांस्कृतिक पहलुओं की तुलना करने के तरीके ने कई दर्शकों को नाराज कर दिया है। एक दृश्य में दाल और चावल वाले पारंपरिक भारतीय भोजन की तुलना कोरियाई रामेन से की गई है।

एक अन्य दृश्य में मुख्य किरदार को भारतीय फिल्मों के बजाय के-पॉप मनोरंजन चुनते हुए दिखाया गया है। आलोचकों का तर्क है कि इन दृश्यों में भारतीय अनुभवों को नीरस दिखाया गया है, जबकि कोरियाई विकल्पों को ज्यादा आकर्षक तरीके से पेश किया गया है। विज्ञापन 7 अक्टूबर, 2026 को जारी किया गया था, लेकिन एक्स पर इसके वीडियो व्यापक रूप से फैलने के बाद इसकी आलोचना और तेज हो गई।

भारतीय के-पॉप प्रशंसकों ने हाइब पर स्थानीय संस्कृति का अपमान करने का आरोप लगाया

भारतीय प्रशंसकों ने सवाल उठाया है कि हाइब एक बड़े संगीत महोत्सव का प्रचार करने के लिए ऐसी तुलनाएं क्यों कर रही है, जिन्हें वे मेजबान देश की संस्कृति के प्रति अपमानजनक मानते हैं। कई उपयोगकर्ताओं ने विज्ञापन को सांस्कृतिक रूप से असंवेदनशील बताया, जबकि कुछ ने कंपनी पर नस्लवाद का आरोप भी लगाया।

लगातार सामने आ रही शिकायतों में से एक दाल-चावल को कोरियाई रामेन से कम रोमांचक दिखाने को लेकर है। कुछ प्रशंसकों ने भारतीय मनोरंजन के चित्रण की भी आलोचना की और तर्क दिया कि के-पॉप पसंद करने का मतलब बॉलीवुड या अन्य भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को कमतर समझना नहीं होना चाहिए।

यह आलोचना मुख्य रूप से विज्ञापन की प्रस्तुति को लेकर है, न कि कोरियाई संगीत को लेकर। ये दर्शकों द्वारा व्यक्त किए गए आरोप और उनकी व्याख्याएं हैं, नस्लीय भेदभाव के स्थापित प्रमाण नहीं।

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भारत में हाइब के विस्तार के बीच प्रचार के तरीके पर उठे सवाल

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब हाइब भारत के बढ़ते के-पॉप बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी कर रही है। बीटीएस और सेवेंटीन जैसे बड़े संगीत समूहों से जुड़ी कंपनी संगीत, प्रशंसक मंचों और लाइव मनोरंजन के जरिए अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक अपनी पहुंच बढ़ाने पर काम कर रही है। वीवर्स कॉन फेस्टिवल इंडिया इन योजनाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

हालांकि, विज्ञापन ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कंपनी ने अपना प्रचार अभियान तैयार करते समय भारतीय सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं का पर्याप्त ध्यान रखा था। कुछ प्रशंसकों का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय संगीत का जश्न मनाने वाले महोत्सव को सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना चाहिए, न कि यह संकेत देना चाहिए कि एक संस्कृति दूसरी से बेहतर है।

मार्च 2027 में आयोजित होगा वीवर्स कॉन फेस्टिवल इंडिया

ऑनलाइन आलोचनाओं के बावजूद वीवर्स कॉन फेस्टिवल इंडिया का आयोजन 27 और 28 मार्च, 2027 को नई दिल्ली में प्रस्तावित है। इस कार्यक्रम में कोरियाई और भारतीय कलाकारों के एक साथ आने की उम्मीद है। यह दक्षिण कोरिया के बाहर महोत्सव का पहला अंतरराष्ट्रीय संस्करण होगा।

कुछ प्रशंसकों ने आयोजन स्थल के रूप में नई दिल्ली को चुनने पर भी चिंता जताई है, खासकर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर। 14 अक्टूबर, 2026 तक विज्ञापन विवाद पर सीधे प्रतिक्रिया देने वाला हाइब का कोई पुष्ट सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

महोत्सव में शामिल होने वाले सभी कलाकारों की सूची का भी अभी इंतजार है। फिलहाल, प्रचार अभियान भारतीय के-पॉप प्रशंसकों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गया है और कई लोग स्थानीय संस्कृति को अधिक संवेदनशीलता और समझदारी के साथ प्रस्तुत करने की मांग कर रहे हैं।

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