NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी भी छात्रों के समर्थन में पहुंचीं। हालांकि, इस दौरान उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस कार्रवाई के दौरान छोड़े गए आंसू गैस के धुएं की वजह से शबाना आजमी को सांस लेने में दिक्कत हुई और उन्हें अस्थमा का दौरा पड़ गया।
आंसू गैस के धुएं से हुई सांस लेने में परेशानी
यह घटना उस वक्त हुई जब प्रदर्शनकारी छात्र ‘चलो संसद’ मार्च के तहत आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसके बाद इलाके में धुआं फैल गया। इसी धुएं की चपेट में आने के बाद शबाना आजमी को अचानक सांस लेने में परेशानी होने लगी।
बताया गया कि अभिनेत्री पहले से ही अस्थमा की समस्या से जूझ रही हैं। स्थिति बिगड़ने पर उनके साथ मौजूद लोगों ने उन्हें सुरक्षित जगह पर पहुंचाया। राहत की बात यह रही कि उनके पास इनहेलर मौजूद था, जिसकी मदद से उन्होंने अपनी हालत को नियंत्रित किया।

शबाना आजमी ने दिया अपना हेल्थ अपडेट
घटना के बाद अभिनेत्री के प्रशंसक उनकी सेहत को लेकर चिंतित हो गए थे। इसके बाद शबाना आजमी ने खुद अपनी तबीयत को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से अस्थमा की मरीज हैं और आंसू गैस के धुएं की वजह से उन्हें अचानक अटैक आया था।
एक्ट्रेस ने कहा कि समय रहते इनहेलर का इस्तेमाल करने से उनकी स्थिति संभल गई और अब वह पूरी तरह ठीक हैं। उन्होंने अपने फैंस को भरोसा दिलाया कि चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

तबीयत संभलते ही दोबारा प्रदर्शन में हुईं शामिल
शबाना आजमी की हिम्मत की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद उन्होंने प्रदर्शन से दूरी नहीं बनाई। आराम करने के बाद वह दोबारा छात्रों के बीच पहुंचीं और पुलिस कार्रवाई में घायल हुए प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की।
उन्होंने छात्रों के संघर्ष और हिम्मत की सराहना करते हुए कहा कि अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले छात्रों का साहस काबिल-ए-तारीफ है। अभिनेत्री का यह जज्बा देखकर कई लोगों ने उनकी सराहना की।
छात्रों के समर्थन में दिखीं शबाना आजमी
75 साल की उम्र में भी शबाना आजमी का छात्रों के समर्थन में सड़क पर उतरना चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने अपने स्वास्थ्य की परवाह किए बिना छात्रों के साथ खड़े होकर यह संदेश दिया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को उठाना बेहद जरूरी है।

