5 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई बॉबी देओल की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'बंदर' अचानक सुर्खियों में आ गई है। हालांकि फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से शानदार प्रतिक्रिया मिल रही थी, लेकिन रिलीज के कुछ ही घंटों बाद इसकी स्क्रीनिंग को अस्थायी रूप से रोक दिए जाने की खबर ने सभी को चौंका दिया।
दर्शकों और क्रिटिक्स से मिला शानदार रिस्पॉन्स
अनुराग कश्यप के निर्देशन में बनी 'बंदर' एक क्राइम-ड्रामा और थ्रिलर फिल्म है, जिसमें बॉबी देओल ने दमदार अभिनय किया है। फिल्म देखने वाले दर्शकों ने सोशल मीडिया पर इसकी खूब तारीफ की है। कई समीक्षकों ने इसे 3.5 से 4 स्टार तक की रेटिंग दी है और बॉबी देओल के प्रदर्शन को फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बताया है।
ऐसे में फिल्म की स्क्रीनिंग रुकने की खबर ने हर किसी को हैरान कर दिया।

क्या क्लैश बना वजह?
पहले यह माना जा रहा था कि 'बंदर' की मुश्किलों की वजह उसी दिन रिलीज हुई वरुण धवन की 'है जवानी तो इश्क होना है' और राम चरण की 'पेड्डी' के साथ बॉक्स ऑफिस टकराव हो सकता है। लेकिन सामने आई जानकारी कुछ और ही कहानी बयां करती है।
मामला फिल्मों के कंटेंट या दर्शकों की कमी का नहीं, बल्कि थिएटर शो के बंटवारे का बताया जा रहा है।
मेकर्स ने लगाया शो वितरण में भेदभाव का आरोप
रिपोर्ट्स के अनुसार, 'बंदर' के निर्माताओं ने मल्टीप्लेक्स चेन से केवल सीमित और उचित संख्या में शो की मांग की थी। उनका कहना था कि 5 स्क्रीन वाले थिएटर में चार शो और 4 स्क्रीन वाले थिएटर में दोपहर के बाद तीन शो पर्याप्त रहेंगे।
हालांकि निर्माताओं का आरोप है कि बड़े मल्टीप्लेक्स नेटवर्क्स ने उनकी फिल्म को अपेक्षा से काफी कम स्क्रीन और शो उपलब्ध कराए। इससे फिल्म की पहुंच और कमाई दोनों प्रभावित हो सकती थीं।

मेकर्स ने लिया कड़ा फैसला
स्थिति से नाराज होकर 'बंदर' की टीम ने विरोध दर्ज कराया और फिल्म की प्रोग्रामिंग को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया। उनका मानना है कि जब तक सभी फिल्मों को निष्पक्ष तरीके से शो नहीं दिए जाते, तब तक रिलीज को जारी रखना सही नहीं होगा।
सूत्रों के मुताबिक, फिल्म की टीम थिएटर मालिकों और राष्ट्रीय सिनेमा चेन के साथ बातचीत कर रही है ताकि शो का संतुलित वितरण सुनिश्चित किया जा सके।
फैंस में दिखा गुस्सा
फिल्म को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बावजूद स्क्रीनिंग रोकने की खबर ने फैंस को नाराज कर दिया है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सवाल उठाए हैं कि यदि किसी फिल्म को दर्शकों का अच्छा समर्थन मिल रहा है, तो उसे पर्याप्त शो क्यों नहीं दिए जा रहे।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि थिएटर चेन और फिल्म निर्माताओं के बीच यह विवाद कब सुलझता है और 'बंदर' दोबारा पूरी क्षमता के साथ सिनेमाघरों में कब लौटती है।
निष्कर्ष
'बंदर' का मामला केवल एक फिल्म की रिलीज का नहीं, बल्कि थिएटर स्क्रीन और शो वितरण की उस व्यवस्था का भी है, जिस पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। सकारात्मक समीक्षाओं और मजबूत वर्ड-ऑफ-माउथ के बावजूद फिल्म की स्क्रीनिंग रुकना इंडस्ट्री के लिए चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है।

