द ववान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट दीपक कुमार मिश्रा और अरुणाभ कुमार के निर्देशन में बनी हिंदी लोककथा आधारित थ्रिलर है, जिसमें सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमन्ना भाटिया, सुनील ग्रोवर, अनूप सोनी, श्वेता तिवारी और मनीष पॉल मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म की कहानी एक दुखी दंपति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो छठ पूजा के लिए अपने पुश्तैनी गांव लौटता है और वन देवी व अलौकिक शक्तियों से जुड़ी एक पुरानी जंगल की लोककथा में उलझ जाता है। फिल्म का लोककथा आधारित विचार और कुछ माहौल बनाने वाले दृश्य उम्मीद जगाते हैं, लेकिन पटकथा लगातार नए विचार जोड़ती रहती है, जिससे शुरुआती रहस्य का असर धीरे-धीरे कम हो जाता है।
द ववान फिल्म की जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| फिल्म का नाम | द ववान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट |
| रिलीज डेट | 25 सितंबर 2026 |
| शैली | लोक थ्रिलर, हॉरर, फैंटेसी |
| निर्देशक | दीपक कुमार मिश्रा, अरुणाभ कुमार |
| लेखक | अरुणाभ कुमार |
| निर्माता | शोभा कपूर, एकता कपूर |
| मुख्य कलाकार | सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमन्ना भाटिया |
| ओटीटी प्लेटफॉर्म | घोषित नहीं |
| रेटिंग | 2/5 |
फिल्म 25 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। इसमें भारतीय लोककथा, छठ पूजा, अलौकिक तत्वों और पारंपरिक मान्यताओं व आधुनिक विकास के बीच संघर्ष को एक साथ जोड़ा गया है।
द ववान की कहानी
ऋषि (सिद्धार्थ मल्होत्रा) अपनी पत्नी ममता (तमन्ना भाटिया) के साथ छठ पूजा और पारिवारिक जमीन के विवाद के सिलसिले में अपने पुश्तैनी गांव देवांचल लौटता है। यह दंपति छह साल पहले अपने अजन्मे बच्चे को खोने के गम से भी जूझ रहा है। ऋषि कभी वन देवी में विश्वास करता था, लेकिन इस त्रासदी के बाद धीरे-धीरे तर्कवादी बन गया है।
देवांचल में सख्त नियम है कि सूर्यास्त के बाद कोई भी जंगल में प्रवेश नहीं कर सकता। स्थानीय मान्यता के अनुसार, सदियों पहले वन देवी ने गांव के चारों ओर सुरक्षा सीमा बनाकर अंधेरी अलौकिक शक्तियों को जंगल के भीतर कैद कर दिया था। बाद में एक गांववाले का बैल जंगल के अंदर चला जाता है और उसे खोजने के लिए ऋषि भी वहां पहुंच जाता है।
जब वह सुरक्षित वापस लौटता है, तो गांववालों को विश्वास होने लगता है कि वह उस प्राचीन कथा से जुड़े सही वंशज हो सकता है। इसी बीच स्थानीय कारोबारी दीपक (सुनील ग्रोवर) इलाके में विकास लाना चाहता है और जंगल के बीच से सड़क बनाने की योजना बनाता है। कहानी आगे ऋषि, दीपक, गांववालों और जंगल के भीतर छिपी अलौकिक शक्तियों के बीच संघर्ष पर केंद्रित होती है।
#TheVvaan: STUNNING
— Box Office Chronicle (@BoxOffice_Truth) September 25, 2026
Rating: ⭐️⭐️⭐️1/2#TheVvaanReview
There are multiple reasons why this deserves to be on your watch list this weekend. Firstly, it attempts something relatively uncommon in mainstream Hindi cinema by placing folklore and fantasy at the heart of an expansive… pic.twitter.com/hvTrlLtHb0
द ववान रिव्यू: बहुत सारे विचारों के नीचे दब गई अच्छी लोककथा
द ववान की सबसे बड़ी ताकत इसका मूल विचार है। एक देवी, प्रतिबंधित जंगल, प्राचीन वंश, दुखी दंपति और आस्था व आधुनिक विकास के बीच फंसा गांव फिल्म को मजबूत आधार देते हैं। शुरुआती हिस्से जंगल और उसके रहस्यमय नियमों को लेकर उत्सुकता पैदा करते हैं। कागज पर ऋषि की यात्रा भी दिलचस्प लगती है। अपने बच्चे को खोने के बाद उसका विश्वास खत्म हो चुका है, लेकिन गांववाले उसे अपनी मान्यताओं के सच होने का प्रमाण मानने लगते हैं।
यह फिल्म का भावनात्मक केंद्र बन सकता था, खासकर ममता की दोबारा मां बनने की इच्छा के साथ। लेकिन पटकथा इस दिलचस्प संघर्ष से बार-बार दूर चली जाती है। धीरे-धीरे दीपक की कहानी ज्यादा जगह लेने लगती है और इसके साथ और भी कई व्याख्याएं व पौराणिक बातें जोड़ दी जाती हैं। एक बार फिल्म अलौकिक शक्तियों के बारे में जरूरत से ज्यादा जानकारी दे देती है, तो जंगल का रहस्य कम होने लगता है।
दूसरा भाग ज्यादा शोरगुल वाला हो जाता है और अलौकिक लड़ाइयों पर ज्यादा निर्भर करता है। फिल्म उस डरावनी लोककथा से दूर चली जाती है जिसे शुरुआत में धीरे-धीरे तैयार किया गया था और आखिर में एक बड़े टकराव तक पहुंचती है, जो पहले बनाए गए शांत रहस्य से कुछ अलग महसूस होता है।
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सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया का अभिनय दमदार
सिद्धार्थ मल्होत्रा ऋषि की भूमिका में प्रभावी लगते हैं और शहर में पले-बढ़े उस तर्कवादी किरदार को सहज रखते हैं, जो उन मान्यताओं से जूझ रहा है जिन्हें वह अब स्वीकार नहीं करता। हालांकि, पटकथा में लगातार नए घटनाक्रम जुड़ने के कारण उनके किरदार को पर्याप्त भावनात्मक जगह नहीं मिलती। तमन्ना भाटिया ममता के रूप में फिल्म को भावनात्मक आधार देती हैं।
दोबारा मां बनने की उनकी इच्छा कहानी को निजी और भावनात्मक पहलू देती है, खासकर छठ से जुड़े हिस्सों में। सुनील ग्रोवर दीपक की भूमिका में अपनी आम कॉमेडी छवि से अलग जाने की कोशिश करते हैं। अनूप सोनी और श्वेता तिवारी भरोसेमंद हैं, लेकिन उनके किरदारों का इस्तेमाल सीमित है। मनीष पॉल वीपी के रूप में कॉमेडी लेकर आते हैं और कई दृश्यों में उनकी टाइमिंग काम करती है, हालांकि कुछ मजाक दोहराव वाले लगते हैं।
#TheVvan Review: A rich folklore concept marred by weak execution and poor visuals.
— Aavishkar (@aavishhkar) September 25, 2026
Rating: 2.5⭐️
The Vvaan is a mixed bag. It boasts a intriguing folklore premise with immense potential but the weak screenplay and clumsy execution drag it down, leaving the plot almost as… pic.twitter.com/7qf5WAoYYG
तकनीकी पक्ष और दृश्य प्रभाव
छठ पूजा वाले हिस्से फिल्म के बेहतर दृश्य और माहौल बनाने वाले पलों में शामिल हैं। जब फिल्म इन रस्मों और गांव के माहौल को पर्याप्त जगह देती है, तो वे ज्यादा वास्तविक महसूस होते हैं, बजाय इसके कि उन्हें सिर्फ पृष्ठभूमि के तौर पर इस्तेमाल किया जाए।
हालांकि, जंगल उतना डरावना नहीं बन पाता, जितना कहानी उसे दिखाना चाहती है। बैकग्राउंड स्कोर कई बार ऐसे तनाव को पैदा करने की कोशिश करता है, जिसे दृश्य अभी तक पर्याप्त रूप से तैयार नहीं कर पाए हैं। दृश्य प्रभाव भी कुछ अलौकिक दृश्यों को कमजोर कर देते हैं, क्योंकि कई जीव जरूरत से ज्यादा डिजिटल दिखाई देते हैं।
क्या हैं फिल्म की कमजोरियां?
- बिखरी हुई पटकथा
- कमजोर अलौकिक दृश्य प्रभाव
- दोहराव वाली कॉमेडी
- अविश्वसनीय क्लाइमैक्स
क्या द ववान देखनी चाहिए?
इसे देखें अगर आप:
- भारतीय लोककथाएं पसंद करते हैं।
- अलौकिक कहानियां पसंद करते हैं।
- सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्में देखते हैं।
- पौराणिक कथाओं पर आधारित थ्रिलर पसंद करते हैं।
इसे छोड़ सकते हैं अगर आप:
- कसी हुई पटकथा चाहते हैं।
- वास्तविक हॉरर की उम्मीद कर रहे हैं।
- जटिल पौराणिक कहानियां पसंद नहीं करते।
- यथार्थवादी थ्रिलर पसंद करते हैं।
First Half: #TheVvaan review
— Parth Chaturvedi (@_mrchaturvedi) September 25, 2026
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Opening sequence itself is AI slop. Jungle scenes are full of green screen and… https://t.co/LxXvhDYTQQ
अंतिम फैसला
द ववान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट के केंद्र में एक दिलचस्प विचार है। वन देवी की लोककथा, छठ पूजा, प्रतिबंधित जंगल और दुखी दंपति का मेल एक ऐसा लोक थ्रिलर बना सकता था, जिसमें माहौल और भावनाओं दोनों के लिए पर्याप्त गुंजाइश थी।
हालांकि, फिल्म अपनी मुख्य कहानी को स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ाने के बजाय लगातार पौराणिक बातें, व्याख्याएं, किरदार और बड़े दृश्य जोड़ती रहती है। जैसे-जैसे ज्यादा जवाब सामने आते हैं, रहस्य कम प्रभावी होता जाता है और दूसरा भाग शुरुआती हिस्से में बनाए गए माहौल का काफी हिस्सा खो देता है।
रेटिंग: 2/5
कुल मिलाकर, द ववान उन दर्शकों के लिए एक बार देखने लायक फिल्म है जिन्हें भारतीय लोककथाएं और अलौकिक कहानियां पसंद हैं। इसमें अच्छा विचार, कुछ अच्छे अभिनय और दिलचस्प सांस्कृतिक दृश्य हैं, लेकिन बिखरी हुई लेखनी और असमान प्रस्तुति इसे अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने से रोकती है।
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