भुवन बाम, रोहित सराफ, प्रतीभा रांटा और गुरफतेह सिंह पीरजादा जैसे कलाकारों से सजी वेब सीरीज 'द रिवोल्यूशनरीज' (The Revolutionaries) प्राइम वीडियो पर रिलीज हो चुकी है। निखिल आडवाणी के निर्देशन में बनी यह हिस्टोरिकल पीरियड ड्रामा भारत की आजादी की लड़ाई के उस पहलू को सामने लाती है, जिसके बारे में आम लोगों के बीच अपेक्षाकृत कम चर्चा होती है।
सीरीज का केंद्र क्रांतिकारी रास बिहारी बोस हैं, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत की नाक के नीचे रहकर कई क्रांतिकारी गतिविधियों को अंजाम दिया और बाद में विदेश जाकर भी भारत की आजादी के लिए संघर्ष जारी रखा।
भुवन बाम ने रास बिहारी बोस, रोहित सराफ ने सचिंद्रनाथ सान्याल, प्रतीभा रांटा ने प्रतीभा लाहिरी, गुरफतेह सिंह पीरजादा ने बाघा जतिन और जेसन शाह ने जनरल डायर की भूमिका निभाई है।
The Revolutionaries की कहानी किस बारे में है?
सीरीज की कहानी लेखक संजीव सान्याल की नॉन-फिक्शन किताब 'Revolutionaries: The Other Story of How India Won Its Freedom' से प्रेरित है। इसमें उन क्रांतिकारियों की कहानी दिखाई गई है, जिन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष का रास्ता चुना था।
कहानी रास बिहारी बोस से शुरू होती है, जो ब्रिटिश सरकार के लिए सबसे बड़े वांटेड क्रांतिकारियों में शामिल हो चुके हैं। अंग्रेज उन्हें पकड़ने के लिए लगातार अभियान चलाते हैं, लेकिन बोस बार-बार उनके हाथ से निकल जाते हैं।
उनके संपर्क देश के अलग-अलग हिस्सों में फैले हुए हैं। बनारस, कलकत्ता, देहरादून और अमृतसर जैसे शहरों में मौजूद सहयोगियों की मदद से वह अपनी गतिविधियां जारी रखते हैं।
इसी दौरान उनकी मुलाकात सचिंद्रनाथ सान्याल से होती है। सान्याल भी देश को आजाद कराने के लिए क्रांतिकारी रास्ता चुनते हैं और बोस के साथ जुड़ जाते हैं। बाद में बाघा जतिन भी इस संघर्ष का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते हैं।
तीनों मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ योजनाएं बनाते हैं और हथियार हासिल करने की कोशिश करते हैं। लेकिन हर योजना सफल नहीं होती। कई बार अपनों से धोखा मिलता है और कई निर्दोष लोग भी इन घटनाओं की चपेट में आते हैं।
जैसे-जैसे क्रांतिकारियों का नेटवर्क मजबूत होता है, ब्रिटिश सरकार की कार्रवाई भी तेज हो जाती है। जनरल डायर इनके पीछे पड़ जाता है और कहानी संघर्ष के एक और गंभीर दौर में पहुंच जाती है।
The Revolutionaries Trailer Review | Next Level Adrenaline Rush! 🔥
— Amit Bhatia (@amitbhatia1509) August 30, 2026
Bhuvan Bam, Rohit Saraf, Gurfateh Pirzada and Pratibha Ranta bring raw rebellion, action and intensity—this trailer gives a proper adrenaline rush! The series premieres on Prime Video on September 11.
(The… pic.twitter.com/T9RUFVfa1h
सीरीज में किन क्रांतिकारियों की कहानी दिखाई गई है?
'द रिवोल्यूशनरीज' सिर्फ रास बिहारी बोस की कहानी नहीं है, बल्कि इसमें कई क्रांतिकारी किरदारों को साथ लेकर कहानी आगे बढ़ती है।
- रास बिहारी बोस: कहानी के मुख्य किरदार और ब्रिटिश सरकार के प्रमुख निशानों में से एक।
- सचिंद्रनाथ सान्याल: बोस के साथ जुड़ने वाले युवा क्रांतिकारी।
- बाघा जतिन: क्रांतिकारी आंदोलन के महत्वपूर्ण चेहरों में से एक।
- प्रतीभा लाहिरी: कहानी के निजी और भावनात्मक पक्ष को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण किरदार।
- जनरल डायर: क्रांतिकारियों के खिलाफ ब्रिटिश कार्रवाई का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रमुख किरदार।
द रिवोल्यूशनरीज वेब सीरीज डिटेल्स
| कैटेगरी | डिटेल |
|---|---|
| सीरीज का नाम | The Revolutionaries |
| हिंदी नाम | द रिवोल्यूशनरीज |
| जॉनर | हिस्टोरिकल पीरियड ड्रामा |
| निर्देशक | निखिल आडवाणी |
| मुख्य कलाकार | भुवन बाम, रोहित सराफ, प्रतीभा रांटा, गुरफतेह सिंह पीरजादा |
| अन्य कलाकार | जेसन शाह, पाउली दाम |
| मुख्य किरदार | रास बिहारी बोस |
| एपिसोड | 8 |
| भाषा | हिंदी |
| प्लेटफॉर्म | प्राइम वीडियो |
| कहानी का आधार | संजीव सान्याल की किताब |
| समयकाल | ब्रिटिश राज और स्वतंत्रता आंदोलन का दौर |

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निखिल आडवाणी का निर्देशन कितना असरदार है?
निखिल आडवाणी ने कहानी को केवल अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष तक सीमित नहीं रखा है। उन्होंने क्रांतिकारियों की निजी जिंदगी, उनके रिश्तों और भावनात्मक संघर्ष को भी कहानी में जगह दी है।
सीरीज की सबसे बड़ी ताकत इसका पीरियड ट्रीटमेंट है। वाराणसी, कोलकाता और अमृतसर जैसे शहरों के साथ-साथ पुराने दिल्ली के माहौल को भी दोबारा पर्दे पर रचने की कोशिश की गई है।
खास बातें:
- पुराने भारत के माहौल को बनाने पर ध्यान दिया गया है।
- कहानी में क्रांतिकारी गतिविधियों और निजी जिंदगी को साथ रखा गया है।
- अलग-अलग शहरों की घटनाओं को एक ही कहानी से जोड़ा गया है।
- ऐतिहासिक घटनाओं के साथ किरदारों के व्यक्तिगत संघर्ष को भी जगह मिली है।
हालांकि, जिन दर्शकों ने 'फ्रीडम एट मिडनाइट' जैसी सधी हुई ऐतिहासिक प्रस्तुति देखी है, उन्हें यहां कुछ अंतर जरूर महसूस हो सकता है। दोनों सीरीज का विषय और ट्रीटमेंट अलग है, इसलिए तुलना करने के बजाय 'द रिवोल्यूशनरीज' को उसकी अपनी कहानी के आधार पर देखना बेहतर होगा।

भुवन बाम से रोहित सराफ तक, कैसी है एक्टिंग?
सीरीज की कास्टिंग इसकी मजबूत कड़ियों में से एक है। चारों प्रमुख युवा कलाकारों ने अपने किरदारों को अलग-अलग अंदाज में निभाया है।
भुवन बाम ने रास बिहारी बोस के रूप में गंभीर और संयमित अभिनय किया है। उनके चेहरे के भाव कई दृश्यों में बिना ज्यादा संवाद के भी किरदार की बेचैनी और दृढ़ता को सामने लाते हैं।
रोहित सराफ सचिंद्रनाथ सान्याल के किरदार में अच्छे लगते हैं। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और प्रतीभा रांटा के साथ केमिस्ट्री कहानी के भावनात्मक हिस्से को मजबूत करती है। वहीं क्रांतिकारी के रूप में उनका दूसरा पहलू भी प्रभावी है।
गुरफतेह सिंह पीरजादा ने बाघा जतिन के किरदार को ऊर्जा और गंभीरता के साथ निभाया है। उनके किरदार में क्रांतिकारी तेवर साफ नजर आते हैं।
प्रतीभा रांटा ने अपने किरदार के भावनात्मक पक्ष को अच्छी तरह संभाला है।
वहीं जेसन शाह जनरल डायर के किरदार में प्रभाव छोड़ते हैं। उनका किरदार दर्शकों के अंदर गुस्सा पैदा करता है और एक नकारात्मक किरदार के तौर पर यही उनकी सफलता है।
पाउली दाम समेत बाकी सपोर्टिंग कास्ट ने भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है।
The Revolutionaries….. out on Amazon Prime on 11th September pic.twitter.com/7rAAEMDhM8
— Sanjeev Sanyal (@sanjeevsanyal) August 18, 2026
सीरीज की सबसे बड़ी खूबियां क्या हैं?
'द रिवोल्यूशनरीज' की कुछ खूबियां इसे देखने लायक बनाती हैं:
- मजबूत पीरियड सेटिंग: पुराने दौर को पर्दे पर दोबारा बनाने की कोशिश प्रभावी है।
- क्रांतिकारियों पर फोकस: कहानी आजादी के आंदोलन के कम चर्चित पहलू को सामने लाती है।
- अच्छी कास्ट: भुवन बाम, रोहित सराफ और गुरफतेह सिंह पीरजादा ने प्रभाव छोड़ा है।
- महिला किरदारों की भूमिका: स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं के योगदान को भी कहानी में जगह दी गई है।
- कई किरदार, एक कहानी: रास बिहारी बोस के साथ सान्याल और बाघा जतिन की कहानियां भी जुड़ी रहती हैं।
- पेसिंग: आठ एपिसोड होने के बावजूद कहानी ज्यादातर जगहों पर दर्शकों को बांधे रखती है।
1911 के बाद दिल्ली को राजधानी बनाए जाने के दौर से जुड़ी घटनाओं से लेकर रास बिहारी बोस के भारत से बाहर जाने तक की कहानी को अलग-अलग घटनाओं के जरिए आगे बढ़ाया गया है।
कहां कमजोर पड़ती है The Revolutionaries?
हर पहलू मजबूत होने के बावजूद सीरीज में कुछ कमियां भी हैं।
एडिटिंग और सिनेमैटोग्राफी:
कुछ हिस्सों में एडिटिंग और विजुअल ट्रीटमेंट को और बेहतर किया जा सकता था। कहानी का स्केल बड़ा है, लेकिन हर जगह विजुअल इम्पैक्ट एक जैसा नहीं बन पाता।
लव एंगल की पुनरावृत्ति:
रोहित सराफ और प्रतीभा रांटा के बीच दिखाए गए रिश्ते को कुछ जगहों पर दोहराव महसूस होता है। इसकी जगह बाघा जतिन और अन्य सपोर्टिंग किरदारों को थोड़ा और स्पेस दिया जा सकता था।
रास बिहारी बोस की निजी जिंदगी:
कहानी के केंद्र में होने के बावजूद बोस की निजी जिंदगी को अपेक्षाकृत कम जगह मिली है। अगर उनके व्यक्तिगत संघर्ष और रिश्तों को थोड़ा और विस्तार दिया जाता, तो किरदार से दर्शकों का जुड़ाव और मजबूत हो सकता था।

क्या The Revolutionaries बोर करती है?
आठ एपिसोड की सीरीज होने के बावजूद इसका पेस ज्यादातर हिस्सों में ठीक रहता है। कहानी में लगातार क्रांतिकारी गतिविधियों, ब्रिटिश कार्रवाई और किरदारों की निजी जिंदगी को आगे बढ़ाया जाता है।
लगभग 45 मिनट के आसपास के कई एपिसोड होने के बावजूद सीरीज में ऐसा नहीं लगता कि कहानी को केवल लंबा करने के लिए घटनाएं जोड़ी गई हैं।
हां, कुछ भावनात्मक हिस्सों में गति थोड़ी धीमी जरूर महसूस हो सकती है, लेकिन कुल मिलाकर सीरीज दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखती है।
The Revolutionaries क्यों देखें?
अगर आपको भारतीय इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम और पीरियड ड्रामा पसंद हैं, तो यह सीरीज आपके लिए अच्छी पसंद हो सकती है।
इसे देखने की प्रमुख वजहें:
- रास बिहारी बोस की कहानी को केंद्र में रखा गया है।
- सचिंद्रनाथ सान्याल और बाघा जतिन जैसे क्रांतिकारियों को भी जगह मिली है।
- स्वतंत्रता आंदोलन का कम चर्चित पक्ष सामने आता है।
- पीरियड सेटिंग और लोकेशंस कहानी को विश्वसनीय बनाते हैं।
- कलाकारों का प्रदर्शन कहानी को संभालता है।
- महिलाओं के योगदान को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया है।
Final Verdict: देखनी चाहिए या नहीं?
'द रिवोल्यूशनरीज' आजादी की लड़ाई को एक अलग नजरिए से देखने की कोशिश करती है। रास बिहारी बोस को केंद्र में रखकर कहानी सचिंद्रनाथ सान्याल और बाघा जतिन जैसे क्रांतिकारियों तक पहुंचती है और उनके संघर्ष को बड़े कैनवास पर दिखाती है।
भुवन बाम, रोहित सराफ, गुरफतेह सिंह पीरजादा और प्रतीभा रांटा का अभिनय सीरीज की बड़ी ताकत है। पीरियड सेटिंग और ऐतिहासिक घटनाओं की प्रस्तुति भी कहानी को आकर्षक बनाती है।
हालांकि एडिटिंग, सिनेमैटोग्राफी और कुछ निजी हिस्सों को बेहतर तरीके से पेश किया जा सकता था। रास बिहारी बोस की निजी जिंदगी को भी ज्यादा जगह मिलती तो कहानी और प्रभावशाली बन सकती थी।
कुल मिलाकर, अगर आप इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम की अनसुनी कहानियों में दिलचस्पी रखते हैं, तो 'द रिवोल्यूशनरीज' को देखा जा सकता है।
रेटिंग: 3.5/5
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