दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर (Nana Patekar) के निधन की खबर से हिंदी सिनेमा के प्रशंसकों के बीच शोक की लहर है। करीब पांच दशक लंबे फिल्मी करियर में नाना पाटेकर ने अपने दमदार अभिनय से कई ऐसे किरदार निभाए, जिन्हें दर्शक आज भी याद करते हैं। गंभीर भूमिकाओं से लेकर एक्शन और कॉमेडी तक, उन्होंने हर जॉनर में अपनी अलग पहचान बनाई।
अपने लंबे करियर में नाना पाटेकर ने कई यादगार फिल्मों में काम किया। उनकी कुछ फिल्मों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया, तो कुछ ने बॉक्स ऑफिस पर उनकी लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी। आइए जानते हैं नाना पाटेकर की सबसे बेहतरीन फिल्मों के बारे में, जिन्हें उनके करियर की खास फिल्मों में गिना जाता है।
नाना पाटेकर की टॉप 11 फिल्में
नाना पाटेकर ने 1978 में 'गमन' से बतौर अभिनेता अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने कई दशकों तक बॉलीवुड में शानदार काम किया। उनकी यादगार फिल्मों की लिस्ट में ये नाम प्रमुख हैं:
1. परिंदा (1989)

'परिंदा' नाना पाटेकर के करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक है। विधु विनोद चोपड़ा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में नाना ने अपने अभिनय की गहराई से दर्शकों और समीक्षकों को प्रभावित किया। फिल्म में उनके अभिनय को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली।
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2. प्रहार (1991)
'प्रहार' नाना पाटेकर के लिए बेहद खास फिल्म रही। उन्होंने इसमें अभिनय करने के साथ फिल्म का निर्देशन भी किया था। सेना की पृष्ठभूमि पर बनी इस कहानी में उनका किरदार बेहद प्रभावशाली रहा।
3. तिरंगा (1993)

देशभक्ति और एक्शन से भरपूर 'तिरंगा' में नाना पाटेकर ने एक दमदार पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया। फिल्म में उनके संवाद और अभिनय आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं।
4. क्रांतिवीर (1994)
'क्रांतिवीर' नाना पाटेकर की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल है। फिल्म में उनके किरदार की आक्रामकता, भावनात्मक उतार-चढ़ाव और दमदार संवाद अदायगी को खूब सराहा गया। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
5. अग्निसाक्षी (1996)
मनीष बहल के निर्देशन में बनी 'अग्निसाक्षी' में नाना पाटेकर ने एक चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाई। उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों दोनों से प्रशंसा मिली और इस फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता का सम्मान मिला।
6. यशवंत (1997)

'यशवंत' में नाना पाटेकर ने एक पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई। फिल्म में उनका सख्त और प्रभावशाली अंदाज दर्शकों को काफी पसंद आया।
7. शक्ति: द पावर (2002)
करिश्मा कपूर और नाना पाटेकर स्टारर 'शक्ति: द पावर' में नाना ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फिल्म की कहानी और उनके अभिनय ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
8. अब तक छप्पन (2004)
पुलिस और अपराध की दुनिया पर आधारित 'अब तक छप्पन' में नाना पाटेकर ने इंस्पेक्टर साधु आगाशे का किरदार निभाया। उनका शांत लेकिन बेहद प्रभावशाली पुलिस अधिकारी वाला अंदाज इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबियों में रहा।
9. अपहरण (2005)
प्रकाश झा की 'अपहरण' में नाना पाटेकर ने राजनीति और अपराध की पृष्ठभूमि वाली कहानी में अहम भूमिका निभाई। फिल्म में उनका अभिनय एक बार फिर चर्चा में रहा।
10. वेलकम (2007)

नाना पाटेकर ने गंभीर फिल्मों के साथ कॉमेडी में भी अपनी अलग पहचान बनाई। 'वेलकम' इसका बेहतरीन उदाहरण है। फिल्म में उदय शेट्टी के किरदार में उनकी कॉमिक टाइमिंग और डायलॉग डिलीवरी को दर्शकों ने खूब पसंद किया।
11. आज की आवाज (1984)
नाना पाटेकर के शुरुआती दौर की चर्चित फिल्मों में 'आज की आवाज' भी शामिल है। यह फिल्म उनके शुरुआती अभिनय करियर को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
नाना पाटेकर को किन फिल्मों के लिए मिले नेशनल अवॉर्ड?
नाना पाटेकर उन चुनिंदा कलाकारों में रहे हैं जिन्हें उनके अभिनय के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके नाम से जुड़ी प्रमुख राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मों में शामिल हैं:
- परिंदा – सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता
- क्रांतिवीर – सर्वश्रेष्ठ अभिनेता
- अग्निसाक्षी – सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता
इन पुरस्कारों ने नाना पाटेकर की अभिनय क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नाना पाटेकर की आखिरी फिल्में कौन सी हैं?
अपने लंबे फिल्मी करियर के आखिरी दौर में भी नाना पाटेकर फिल्मों में सक्रिय रहे। 'वनवास' (2024) के जरिए उन्होंने बड़े पर्दे पर वापसी की। अनिल शर्मा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उनके भावनात्मक अभिनय को दर्शकों ने पसंद किया।
इसके बाद नाना पाटेकर 'ओ रोमियो' (2026) में नजर आए। इसके अलावा 'सूबेदार' में उन्होंने कैमियो भूमिका निभाई।

नाना पाटेकर की विरासत
नाना पाटेकर ने करीब पांच दशक तक हिंदी सिनेमा में काम किया और अलग-अलग तरह के किरदारों को अपनी खास शैली में पर्दे पर उतारा। उनकी आवाज, संवाद बोलने का अंदाज और किरदारों में जान डालने की क्षमता उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग बनाती थी।
'परिंदा', 'प्रहार', 'क्रांतिवीर', 'अब तक छप्पन' और 'वेलकम' जैसी फिल्में उनकी अभिनय यात्रा की अलग-अलग तस्वीर पेश करती हैं। नाना पाटेकर का योगदान हिंदी सिनेमा के इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा और उनकी फिल्में आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उनके शानदार अभिनय की मिसाल बनी रहेंगी।
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