‘हैवान’ प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी हिंदी अपराध-रोमांचक फिल्म है, जिसमें सैफ अली खान और अक्षय कुमार मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म 2016 में मलयालम में बनी प्रियदर्शन की फिल्म ‘ओप्पम’ का भारतीय रूपांतरण है। कहानी एक नेत्रहीन व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक खतरनाक अपराधी और उन लोगों के बीच फंस जाता है, जिन्हें वह बचाना चाहता है। फिल्म 11 सितंबर 2026 को रिलीज हो चुकी है। दिलचस्प विषय, अनुभवी कलाकारों और कुछ मजेदार दृश्यों की वजह से यह फिल्म देखने लायक लगती है।
हैवान फिल्म की जानकारी
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| फिल्म का नाम | हैवान |
| रिलीज की तारीख | 11 सितंबर 2026 |
| शैली | अपराध, रोमांच, एक्शन |
| निर्देशक | प्रियदर्शन |
| लेखक | प्रियदर्शन, अबिलाश नायर, रोहन शंकर |
| निर्माता | बेकर निनान फेन, शैलजा देसाई फेन, वेंकट के. नारायण |
| मुख्य कलाकार | सैफ अली खान, अक्षय कुमार, बोमन ईरानी, राजपाल यादव, मोहनलाल |
| ओटीटी मंच | सोनीलिव |
| रेटिंग | 2.5/5 |
हैवान की कहानी
श्याम राणे (सैफ अली खान) फिल्म के मुख्य किरदार हैं, जो नेत्रहीन हैं और मुंबई में सामान्य जिंदगी जीते हैं। वह एक इमारत में रखरखाव प्रबंधक के तौर पर काम करते हैं। आंखों की रोशनी न होने के बावजूद श्याम की सूंघने, सुनने और छूकर महसूस करने की क्षमता बेहद तेज है। वह अपने परिवार और दोस्तों के भी काफी करीब हैं।
हालांकि, उनकी आरामदायक जिंदगी परशुराम गोखले (अक्षय कुमार) के आने के बाद बदल जाती है। परशुराम का अतीत बेहद दर्दनाक है। एक बेबुनियाद आरोप के कारण उसके परिवार की मौत हो जाती है और उसके भीतर का गुस्सा उसे अपने अतीत से जुड़े लोगों का सामना करने के लिए मजबूर करता है।
प्रधान एक पूर्व न्यायाधीश हैं, जिनका किरदार बोमन ईरानी ने निभाया है। उनका अतीत परशुराम की त्रासदी से गहराई से जुड़ा है। जब परशुराम उन लोगों को निशाना बनाना शुरू करता है, जिन्हें वह दोषी मानता है, तब श्याम दो तरफ की आग के बीच फंस जाता है। बाकी कहानी श्याम की उन लोगों को इस खतरनाक व्यक्ति से बचाने की कोशिश पर केंद्रित है।
#Haiwaan Review - ⭐️⭐️⭐️🌟( 3:5 Stars)
— Sumit Kadel (@SumitkadeI) September 11, 2026
Haiwaan is a very powerful and compelling thriller. Yes, it is a remake of #Oppam, but the climax is different, and the film is even more engaging.
The “remake” tag may perhaps work against the film, but if the audience watches it, I’m…
हैवान रिव्यू: लंबी अवधि के नीचे दब गई अच्छी थ्रिलर
हैवान की मूल कहानी काफी दिलचस्प है। एक ऐसे नेत्रहीन व्यक्ति की कहानी, जो अपनी दूसरी इंद्रियों के सहारे एक खतरनाक अपराधी से बचने की कोशिश करता है, रोमांचक शैली के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती है।
लेकिन फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि कहानी चरम बिंदु तक पहुंचने में बहुत ज्यादा समय लेती है। करीब दो घंटे 45 मिनट की अवधि निश्चित रूप से फिल्म की प्रमुख कमियों में शामिल है। शुरुआती हिस्से में किरदारों के विकास और रिश्तों को स्थापित करने पर काफी समय दिया गया है, जिसके कारण वास्तविक रोमांच काफी देर से शुरू होता है।
फिल्म में तीन गाने और शादी का एक दृश्य भी है, जो कहानी को आगे बढ़ाने के बजाय इसकी गति को प्रभावित करते हैं। फिल्म में हास्य भी है, जो कुछ जगहों पर अच्छा काम करता है, खासकर शरीब हाशमी के दृश्यों में।
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सैफ अली खान ने भावनात्मक गर्माहट के साथ संभाला मुख्य किरदार
‘हैवान’ की सबसे बड़ी खूबियों में से एक सैफ अली खान हैं। वह श्याम के किरदार में गर्मजोशी और सहजता लाते हैं, जिससे उनके परिवार और पड़ोसियों के साथ रिश्ते विश्वसनीय लगते हैं। हालांकि कुश्ती वाले दृश्यों में उनका शारीरिक प्रदर्शन बहुत प्रभावशाली नहीं लगता, लेकिन वह किरदार की छोटी-छोटी बारीकियों को अच्छी तरह निभाते हैं। उनका अभिनय ही श्याम को दर्शकों के लिए पर्याप्त भावनात्मक जुड़ाव देता है।
अक्षय कुमार परशुराम की भूमिका में हैं, जो फिल्म के खलनायक हैं। वह किरदार में ऊर्जा, प्रभावशाली संवाद अदायगी और पर्दे पर अपनी मौजूदगी लेकर आते हैं, लेकिन कुछ जगह उनका अभिनय जरूरत से ज्यादा लगता है। खलनायक को अधिक डरावना और खतरनाक होना चाहिए था, लेकिन यहां वह प्रभाव पूरी तरह नहीं बन पाता।
सहायक कलाकारों का काम भी अच्छा है। शरीब हाशमी को फिल्म के कुछ सबसे मजेदार दृश्य मिले हैं, जबकि बोमन ईरानी और दिवंगत असरानी अपने किरदारों में गर्माहट लाते हैं। हालांकि, श्रिया पिलगांवकर और सैयामी खेर को ज्यादा कुछ करने का मौका नहीं मिलता। मोहनलाल भी फिल्म में नजर आते हैं।
A good thriller often comes with a sense of unease and fear of unknown, Haiwaan is the kind of phycological action crime thriller, which combined the both and takes two of accomplished actors in avatars we have never before. The main plot is relatively easy to understand but the… pic.twitter.com/Rw1xVuLwwH
— DNA (@dna) September 11, 2026
संगीत और दृश्य प्रभाव
प्रियदर्शन फिल्म में खासकर रोमांचक हिस्सों के दौरान अंधेरा और रहस्यमय माहौल तैयार करते हैं। मुंबई की पृष्ठभूमि और बंद जगहें कहानी के पक्ष में काम करती हैं, क्योंकि निर्देशक श्याम की असाधारण क्षमताओं और परशुराम से बचने की उसकी कोशिशों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
पृष्ठभूमि संगीत रोमांच पैदा करता है और एक्शन दृश्य फिल्म को जरूरी ऊर्जा देते हैं। हालांकि, गाने कहानी में ज्यादा योगदान नहीं देते और कई बार इसकी गति को बाधित करते हैं।
तकनीकी नजरिए से संपादन फिल्म की सबसे बड़ी समस्या है। कई दृश्यों को छोटा किया जा सकता था, जिससे कहानी पर कोई खास असर नहीं पड़ता। फिल्म में एक रोमांचक थ्रिलर बनने के लिए जरूरी कई चीजें मौजूद हैं, लेकिन इसकी गति लगातार उस स्तर को बनाए नहीं रख पाती।
कमजोर पक्ष
- लंबी अवधि
- धीमी गति
- खलनायक का असमान प्रभाव
- अनावश्यक गाने
क्या हैवान देखनी चाहिए?
इसे देखें अगर आप:
- अपराध और रोमांचक फिल्में पसंद करते हैं।
- सैफ अली खान के प्रशंसक हैं।
- प्रियदर्शन की फिल्में पसंद करते हैं।
- अक्षय कुमार को नकारात्मक भूमिका में देखना चाहते हैं।
इसे छोड़ सकते हैं अगर आप:
- तेज गति वाली रोमांचक फिल्में पसंद करते हैं।
- पहले ही ‘ओप्पम’ देख चुके हैं।
- लंबी फिल्मों को पसंद नहीं करते।
- पूरी फिल्म में लगातार तनावपूर्ण माहौल की उम्मीद करते हैं।
#Haiwaan Review: Priyadarshan made two big mistakes: 1. Thinking of remaking a 2016 thriller like #Oppam. 2. Actually making it and releasing it in cinemas.
— Aavishkar (@aavishhkar) September 11, 2026
Rating: ⭐️⭐️
HAIWAAN is a disappointing affair. It has a strong premise and some good performances, but the execution… pic.twitter.com/Z1aYoSsP70
अंतिम फैसला
‘हैवान’ एक अच्छे विचार और शानदार कलाकारों पर आधारित फिल्म है, लेकिन यह अपने विषय और कलाकारों की क्षमता का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पाती। सैफ अली खान मुख्य किरदार को पसंद करने योग्य बनाते हैं, जबकि अक्षय कुमार खलनायक के रूप में पर्याप्त ऊर्जा देते हैं। शरीब हाशमी और असरानी समेत बाकी कलाकार भी मनोरंजन के कुछ अच्छे पल देते हैं।
फिर भी, धीमी गति और लंबी अवधि फिल्म के रोमांच को लगातार कमजोर करती है। इसके अलावा, परशुराम को लेकर वह डर पैदा नहीं हो पाता, जिसकी कहानी को जरूरत थी। जो दर्शक पहले ओप्पम देख चुके हैं, उनके लिए इस फिल्म में शायद ज्यादा आश्चर्य बाकी नहीं रहेगा।
रेटिंग: 2.5/5
कुल मिलाकर, ‘हैवान’ सैफ अली खान और प्रियदर्शन के प्रशंसकों के लिए एक बार देखने लायक फिल्म है, लेकिन इसे बेहतर रोमांचक अनुभव बनाने के लिए ज्यादा चुस्त संपादन और खलनायक के किरदार में अधिक प्रभाव की जरूरत थी।
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